देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के शेखुल हदीस मौलाना सईद अहमद पालनपुरी (80) का इंतकाल हो गया। उन्होंने मुंबई के प्राइवेट अस्पताल में मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली। मौलाना के इंतकाल से दारुल उलूम समेत पूरे इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
दारुल उलूम देवबंद के सदर मुदर्रिस (मुख्य उस्ताद) एवं शूरा सदस्य मौलाना सईद अहमद पालनपुरी लंबे समय से अपनी खिदमात दे रहे थे। बुजुर्ग आलिम होने के साथ-साथ वह लेखक भी थे। मौलाना को गंभीर बीमारी के चलते करीब तीन माह पूर्व मुंबई ले जाया गया था। एक सप्ताह पूर्व तबीयत ज्यादा खराब होने पर मौलाना को वहां के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां मंगलवार की सुबह करीब 7 बजे वह सबको अलविदा कह गए। मौलाना के इंतकाल से इस्लामिक जगत में शोक है, लेकिन लॉकडाउन के चलते मौलाना को मुंबई स्थित कब्रिस्तान में सपुर्द ए खाक कर दिया गया। दारुल उलूम के मोहतमिम मुफ्ती मौलना अबुल कासिम नोमानी, जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, मौलाना कारी उस्मान मंसूरपूरी, जमीयत के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी, दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मौलाना अब्दुल खालिक संभलवी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी, शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर, मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ़्ती असद कासमी, कारी इसहाक गोरा, मौलाना नूरुलहुदा कासमी, मौलाना नदीमुल वाजदी आदि उलमा ने मौलाना के इंतकाल पर गहरा दुख प्रकट किया है। रामपुर मनिहारान में जामिया दावतुल हक मुइनिया के प्रबंधक मौलाना शमशीर कासमी ने उनके इंतकाल पर शोक जताया है।
मौलाना सईद अहमद पालनपुरी का संक्षिप्त परिचय
देवबंद। अपनी जिंदगी के 56 सालों तक इस्लाम की खिदमत करने वाले बुजुुर्ग आलिम ए दीन शेखुल हदीस मौलाना सईद अहमद पालनपुरी का जन्म सन 1940 में गुजरात के एक छोटे से गांव कालेड़ा जिला बनास काठा में मौलाना यूसुफ के यहां हुआ था। शुरूआती तालीम मौलाना ने वहीं प्राप्त की। इसके बाद मजाहिर उलूम सहारनपुर में दाखिला लिया और आगे की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद 1962 में दारुल उलूम देवबंद से मौलवियत की डिग्री हासिल की। 1964 से 1973 तक गुजरात के सूरत में स्थित दारुल उलूम अशरफिया रानदेर में बतौर उस्ताद पढ़ाने का सिलसिला शुरू किया। 1973 में ही मौलाना की दारुल उलूम में नियुक्ति हो गई।
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बिना तनख्वाह दीन की खिदमत
देवबंद। दारुल उलूम के शेखुल हदीस, सदर मुदर्रिस (मुख्य उस्ताद) और संस्था की सुप्रीम पावर कमेटी मजलिस-ए-शूरा के सदस्य मौलाना सईद अहमद पालनपुरी ने 50 साल तक अलग अलग पदों पर सेवाएं दीं। उन्होंने करीब 10 वर्ष पूर्व संस्था से ली गई सारी तनख्वाह वापस लौटा दी थी। तबसे ही वह बिना तनख्वाह दारुल उलूम में अपनी सेवाएं दे रहे थे।