सहारनपुर के बड़गांव के शब्बीरपुर गांव में बेशक अभी भी संगीनों के साए गली-गली में छाए हों, लेकिन गांव अब दहशत छोड़ शांति और सामान्य की ओर चल पड़ा है। दलितों एवं राजपूत दोनों ही समाज के लोग अपने-अपने कामों में लग गए हैं।
गांव में स्थिति सामान्य करने के लिए दोनों ही समाज के लोग कदम आगे बढ़ा रहे हैं। दलित समाज के लोगों ने खेतों में काम करना भी शुरू कर दिया है और अपने पशुओं तथा जले हुए घरों को भी संवारना शुरू कर दिया है।
जातीय संघर्ष की आग में पिछले 25 दिन से झुलस रहे शब्बीरपुर ने शांति की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। गांव के लोग भी अब शांति चाहते हैं और कह रहे हैं कि बहुत बदनामी हो गई गांव की, आगे कब तक ऐसा चलता रहेगा।
गांव के लोग दहशत को छोड़ अपने-अपने काम में जुट गए हैं। खेत-खलिहानों में फिर से चहल शुरू हो गई है। गांव के युवा गांव में राजनीति नहीं गांव की तरक्की चाहते हैं और किसी के बहकावे में न आने की अपील कर रहे हैं।
गांव के नौजवानों की अपील का असर यह हुआ कि आज कुछ दलित महिलाऐं गांव के एक किनारे पर दूसरे पक्ष के खेतों में धान की रोपाई करती देखी गईं, वहीं कुछ दलित पक्ष के लोग आज गांव में अपने पशुओं को नहलाते तथा टूटे पड़े घरों के दरवाजे की मरम्मत एवं अन्य दूसरे कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए।
गांव के दलित बुजुर्ग सुरेश कहते हैं कि हम दोनों ही पक्षों को इसी गांव में रहना है जैसा भाई चारा हमारे यहां पहले था ऐसा ही दोबारा कायम करना चाहिए। ठाकुर जगमेर सिंह कहते हैं कि दलित और राजपूत एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते, भाईचारा तो बनाना ही पड़ेगा।
पुलिस अधीक्षक देहात विद्या सागर मिश्र का कहना है कि अब गांव पूरी तरह से शांत है दोनों पक्षों के ग्रामीणों ने खेतों में कार्य करना भी शुरू कर दिया है। किसी को कोई डर या कोई दहशत नहीं है।