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भीम आर्मी के चंद्रशेखर ने बदनाम कर दिया कालेज

Tue, 30 May 2017 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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चंद्रशेखर का भाई और मां। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के छुटमलपुर के गांव गंगाली में स्थित एंग्लो हिंदुस्तानी पब्लिक इंटर कालेज भी शब्बीरपुर जातीय हिंसा के बाद अचानक सुर्खियों में है। वजह, शब्बीरपुर कांड के बाद सुर्खियों में आया भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण इसी कालेज में पढ़ा था।
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यहीं पर उसके साथ नल के इस्तेमाल व पानी को लेकर छुआछूत व भेदभाव की बातें प्रचारित की जा रही हैं  और  दावा किया कि उसके बाद उसने दलितों को संगठित करना शुरू कर दिया।

इस कहानी की सच्चाई जानने की कोशिश में  अमर उजाला टीम सोमवार को कालेज में पहुंची तो वहां एक जून को होने वाले गायत्री महोत्सव की तैयारियां चलती नजर आई।
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टीम को देखते ही कालेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सुनील और सुशील पहुंचे और आने की वजह पूछी। चंद्रशेखर का जिक्र आते ही बोले, ‘अजी उसके साथ यहां कुछ नहीं हुआ, उसी ने कालेज को बदनाम कर दिया।’ 

यह दोनों पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखते  हैं, शुरूआती बातचीत के ये टीम को प्रधानाचार्य पास ले गए। गंगाली के ठाकुर परिवार से ताल्लुक रखने वाले स्वतंत्रता सेनानी स्व ठाकुर छज्जु सिंह पुंडीर ने वर्ष 1946 में इस कालेज की स्थापना की थी।

 कालेज के प्रधानाचार्य भूप सिंह बताते हैं कि वह स्वयं दलित छात्र के रुप में 1971 से 78 तक इस विद्यालय अध्ययनरत रहे हैं। वर्ष 2000 में अंग्रेजी प्रवक्ता के रुप में यहीं नियुक्ति पाई।

वर्तमान में कार्यवाहक प्रधानाचार्य का दायित्व है। उनके साथ ना तो छात्र जीवन और ना ही अध्यापन के दौरान कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ। यहां ब्राह्मण, राजपूत और दलित सभी के बच्चे एक ही नल पर पानी पीते हैं तो एक साथ बेंचों पर बैठ कर शिक्षा ग्रहण करते हैं।

पीटीए में भी चार शिक्षक दलित हैं। कुल 33 के स्टाफ में 13 दलित हैं। लिपिक ओमप्रकाश और प्रधान लिपिक संजय राठौर कालेज के बारे में प्रचलित भेदभाव की कहानी को सच्चाई से कोसो दूर बताते हैं।

कालेज के शिक्षकों का कहना है कि दरअसल, चंद्रशेखर पर दलितों की रहनुमाई का भूत सवार है और इसके लिए वह करीब चार वर्षों से सक्रिय है। अब शब्बीरपुर की घटना के बाद उसे अचानक चमकने का मौका मिल गया।

पिछले सात दशक से क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगा रहा एंग्लो हिंदुस्तानी पब्लिक स्कूल और उसका स्टाफ जातीय भेदभाव के आरोपों को सिरे से नकार रहा है।

उधर,  चंद्रशेखर की मां कमलेश देवी का कहना है कि मेरे पति अध्यापक थे और वे जहां जहां तैनात रहे वहां उन्हें भेदभाव का शिकार होना पड़ा। उन्हें पानी भी अलग गिलास में दिया जाता था।

यह बात चंद्रशेखर को बचपन से ही बुरी लगती थी। इसी बात ने उसे अपने समाज के लिए लड़ने का जज्बा दिया। कालेज में पढ़ते वक्त खुद चंद्रशेखर के साथ भी भेदभाव हुआ तो उसने अपने समाज को पहचान दिलाने की ठान ली। उसका बेटा निर्दोष है वह तो किसी का बुरा नहीं कर सकता है।  वह केवल अपने समाज की पहचान मांग रहा है और पुलिस उसे नक्सली बता रही है।
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