सहारनपुर शहर में खड़े सैकड़ों जर्जर भवन उनमें रहने वालों के लिए खतरा बने हुए हैं। इतना ही नहीं, बरसात के दिनों में तीन और चार मंजिला तक इन भवनों के आसपास रहने वाले लोगों की भी जान पर बनी रहती है।
कई बार स्थानीय लोग ऐसे भवनों को हटाने की मांग प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। बेहट क्षेत्र में रसोई की छत गिरने से हुई मौत ने जर्जर भवनों को लेकर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है।
शहर में जर्जर भवनों की संख्या सैकड़ों में है। इनमें ज्यादातर भवन अंग्रेजों के जमाने के बने हैं, जिनकी हालत गिरने जैसी है। पिछले कई साल से बरसात के दिनों में शहर में भवन गिरने के कई हादसे हो चुके हैं।
पिछले वर्ष हिरनमारान में पुुराने भवन का एक हिस्सा गिर जाने से कई लोग दब गए थे। एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। इसके अलावा एक अन्य भवन की छत के मलबे में दबने से एक मां और बेटा को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
इस बार अभी तक तीन से चार हल्की बारिश हुई हैं, जिनमें दो हादसे मकान गिरने के हो चुके हैं। पहला हादसा मानकमऊ में हुआ था, जहां एक मकान की छत गिरने से तीन भाई और बहनों की मौत हो गई थी।
इसके बाद कुछ ही दिन पहले टपरी कला गांव में एक मकान की छत गिरने से कई लोग घायल हो गए थे। ताजा मामला बेहट क्षेत्र का है, जहां रसोई की छत गिरने से एक की मौत हो गई।
इस बार अच्छी बारिश होने की उम्मीद मौसम वैज्ञानिकों ने जताई है। ऐसे में अच्छी बारिश जर्जर भवनों में रहने वालों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। शहर में खड़े जर्जर भवनों में ज्यादातर अंग्रेजों के जमाने के हैं, जिनमें पुराने जमाने से ही कई-कई परिवार रहते आ रहे हैं।
इन लोगों के बीच भवनों पर कब्जे को लेकर विवाद है। ज्यादातर भवनों के मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए कोई भी कार्रवाई कर पाना मुश्किल हो रहा है।