नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में होना है बदलाव, जो अभी तक नहीं हो सका
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अभी तक नई शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार पाठ्य सामग्री विद्यालयों और विद्यार्थियों तक नहीं पहुंची है। ऐसे में बेसिक शिक्षा निदेशक ने फिलहाल पुरानी किताबों से ही पढ़ाने के आदेश दिए हैं।
परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कई दशक से पुराने ढर्रे पर ही पढ़ाई चल रही है। नई शिक्षा नीति 2020 से शिक्षा में बड़ा बदलाव आने का दावा है। ऐसे में एक अप्रैल 2022 से शुरू हुए नए सत्र से नई शिक्षा नीति के तहत पढ़ाई होने की उम्मीद थी। सत्र शुरू हो चुका है परंतु नई शिक्षा नीति 2020 से संबंधित पाठ्य सामग्री अभी तक विद्यालयों में नहीं पहुंची है। ऐसे में विभाग, शिक्षक और विद्यार्थी परेशान हैं। निदेशक ने भी फिलहाल पुरानी किताबों ही से पढ़ाने के आदेश जारी किए हैं। ऐसे में शिक्षक अगली कक्षाओं में पहुंचे छात्रों से किताबें लेकर एकत्र कर रहे हैं। जिससे संबंधित विद्यार्थियों को उनका वितरण किया जा सके। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम आने में अभी समय लगेगा। जनपद में कुल 1438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनमें 2 लाख 17 हजार छात्र पंजीकृत हैं।
नई शिक्ष नीति के तहत यह होना है बदलाव
नई शिक्षा नीति के तहत अब तीन साल के प्री- प्राइमरी के बाद कक्षा शुरू होगी। इसके बाद कक्षा तीन से पांच के तीन साल शामिल किए गए हैं। तीन साल के मिडिल स्टेज में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षा चलेगी। चौथा स्टेज कक्षा नौ से 12 तक चार साल का होगा, जो माध्यमिक विद्यालयों के लिए है। यानी सरकारी विद्यालयों में अब 10, 2 की जगह 5, 3, 3, 4 का पैटर्न लागू होगा।
मातृभाषा का होगा इस्तेमाल
विद्यालयों में भाषा की जटिलता को दूर करने के लिए कक्षा एक से पांच तक की कक्षाओं के बच्चों को मातृभाषा के रूप में स्थानीय बोलचाल की भाषा को इस्तेमाल किए जाने पर बल दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त शिक्षा को रोजगार परक बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से ही व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी।
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत नया पाठ्यक्रम आने में अभी समय लगेगा। ऐसे में निदेशक ने प्रमोट होकर अगली कक्षाओं में पहुंचे विद्यार्थियों से पुरानी किताबें लेकर संबंधित कक्षाओं के विद्यार्थियों को देकर पढ़ाई कराने के आदेश दिए हैं।-अंबरीष कुमारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी