सहारनपुर। सजल सडाना की हत्या के बाद ही पीड़ित परिवार दहशत में आ गया था। काफी दिन तक शहर में रहने के बाद वह पहले तो दिल्ली चले गए थे। इसके बाद वह लुधियाना में शिफ्ट हो गए थे। पीड़ित परिवार में दहशत का यह आलम है कि मंगलवार को जब अदालत ने आरोपियों को सजा सुनाई, तब भी पीड़ित परिवार से कोई सदस्य यहां नहीं पहुंचा।
जनवरी 2009 में सजल सडाना की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी। जब यह वारदात हुई तब सजल की उम्र 15 साल थी और वह कक्षा 09 में पढ़ता था। मासूम का कत्ल होने पर पीड़ित परिवार दहशत में आ गया था। क्योंकि सजल का अपहरण करने के बाद उसके पिता विजय सडाना से 20 लाख रुपये की फिरौती भी मांगी गई थी। व्यापारी और उद्यमियों द्वारा ढांढस बंधाया था, लेकिन लंबे समय तक सहारनपुर में रहना उनको अखर रहा था। इसी वजह से वह लुधियाना जाकर शिफ्ट हो गए। अब सहारनपुर को याद भी नहीं करना चाहते हैं।
मंगलवार को जब आरोपियों को सजा सुनाई गई तो अमर उजाला संवाददाता ने सजल के पिता विजय सडाना से फोन पर संपर्क किया। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि मुझे मालूम नहीं है केस में क्या निर्णय हुआ है, मैं आधा घंटे बाद बात करूंगा।
---- केस में 97 लोगों के बयान दर्ज हुए थे
सजल सडाना हत्याकांड में पुलिस की विवेचना के दौरान 97 लोगों के बयान दर्ज किए थे। इनमें मुकदमे के वादी, गवाहों के अलावा पुलिसकर्मियों और दोषी पक्ष के लोगों के भी बयान शामिल हैं।
---- 12 साल 27 दिन में आया फैसला
हत्यारोपियों ने 26 जनवरी 2009 को सजल का अपहरण किया। अब 23 फरवरी 2021 को आरोपियों को सजा सुनाई गई। इस तरह से 12 साल 27 दिन बाद इस मुकदमे में फैसला सामने आया, जिसमें आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास हुआ।
---- आरोप और उनमें मिली सजा
धारा 364 -- अपहरण करने में सश्रम आजीवन कारावास और 50,000 रुपये अर्थदंड
धारा 302 -- हत्या करने में सश्रम आजीवन कारावास और 50,000 रुपये अर्थदंड
धारा 120 बी -- हत्या का षड्यंत्र रचने पर आजीवन कारावास एवं 20,000 रुपये अर्थदंड
धारा 201 -- साक्ष्य विलोपन पर दो वर्ष सश्रम कारावास और 5000 रुपये अर्थदंड