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सटीक साक्ष्य बने सजा का आधार

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सजल सड़ाना हत्याकांड में आज कोर्ट में आजीवन कारावास के बाद आरोपियो को जेल लेजाती पुलिस - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। सजल सडाना हत्याकांड में तीन दोषियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा मिलने में अहम भूमिका उन साक्ष्यों की रही, जो वारदात के बाद इकट्ठा किए गए। इनमें सजल का पर्श, अंगूठी और घड़ी शामिल है। उक्त सामान को पुलिस ने दोषियों के कब्जे से ही बरामद किया था।
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26 जनवरी 2009 की शाम आवास विकास कॉलोनी स्थित अपने आवास से स्कूटर लेकर निकला था और परिजनों से कहा था कि घूमने जा रहा हूं। इसके बाद वह घर नहीं लौटा था। 27 जनवरी को सदर बाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, जो अज्ञात में हुई थी। इसके बाद उसका स्कूटर सहारनपुर रेलवे स्टेशन परिसर में लावारिस खड़ा मिला था। परिजनों ने दर्ज रिपोर्ट में सजल के पास जो सामान बताया था, उसमें उसका पर्श, घड़ी, चांदी की अंगूठी और मोबाइल फोन शामिल था। अपहरण करने वालों ने पहले तो सजल के मोबाइल फोन से ही उसके पिता को कॉल करके फिरौती की रकम मांगी थी, लेकिन फिर उसका नंबर स्विच ऑफ कर दिया था और अन्य नंबर से कॉल की गई थी। बाद में ढमोला नाले के पास से सजल का शव बोरी में मिला था। बोरी का मुंह रस्सी से बंधा था। बोरी में गेहूं की बाल भी मिली थी। जिससे माना गया था कि सजल की हत्या को गेहूं के खेत में अंजाम दिया गया था। पुलिस ने अंगूठी, पर्श और घड़ी बरामद की थी। अदालत में गवाही के दौरान सजल के पिता ने बरामद सामान को सजल का ही बताया था। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर तीन आरोपियों को दोषी करार दिया गया और सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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