कामधेनु कॉम्प्लेक्स में कड़े बैंगल्स तैयार करते कारीगर
सहारनपुर। सहारनपुर में बने मेटल्स के कड़े और बैंगल्स देश भर के बाजारों में धूम मचा रहे हैं। यहां से प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये का कारोबार हो रहा है। इनकी मांग में लगातार इजाफा बढ़ रही है।
काष्ठ हस्तशिल्प और हौजरी उत्पाद जहां जनपद की पहचान हैं। सहारनपुर की कई इकाइयों में बन रहे मेटल्स के कड़े और बैंगल्स की मांग भी देश भर के बाजारों में बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सिर्फ सहारनपुर में ही कड़े और बैंगल्स में सीएनसी (कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल) से कार्य होना है। यहां पर महिला और पुरुष दोनों के लिए सिल्वर टच, गोल्डन टच, टू-टोन टच वाले कड़े और बैंगल्स बनाए जा रहे हैं। यहां से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड से लेकर राजस्थान तक कई अन्य राज्यों में कड़े और बैंगल्स की सप्लाई होती है। मांग के हिसाब से कड़े और बैंगल्स को तैयार कर देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जा रहा है।
- इन कड़ों की अधिक मांग
कंप्यूटर न्यूमेरिकल कंट्रोल के जरिए धार्मिक भाव वाले जेंट्स कड़े बनाए जाते हैं। इन कड़ों पर सतनाम वाहेगुरू, राधे-राधे, जयश्री श्याम, जय माता दी को कंप्यूटर के माध्यम से लिखा जाता है। विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इन कड़ों की अधिक मांग रहती है।
वर्जन
यहां बने कड़ों और बैंगल्स की मांग देश भर में बाजारों में हैं। यहां पर प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये का माल विभिन्न राज्यों में सप्लाई होता है। आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है। अजय अग्रवाल, उद्यमी।