सहारनपुर के बेगी नाजर गांव में अनीस को खेत में काम करते समय कुत्ते ने काटा था। अनीस ने एक टीका लगवाने के बाद पूरा कोर्स नहीं किया था। इसी लापरवाही के कारण उसकी जान चली गई। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है।
गंगोह क्षेत्र के गांव बेगी नाजर निवासी अनीस (35) की रेबीज से मौत हो गई। उसे करीब एक महीने पहले खेत में काम करते समय पीछे से पीठ पर कुत्ते ने काट लिया था। डॉक्टरों के अनुसार, अनीस ने एक टीका लगवाने के बाद एआरवी का पूरा कोर्स नहीं किया था। इसी लापरवाही के चलते उसकी जान चली गई।
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परिजनों के मुताबिक, अनीस मजदूरी करता था। वह अक्सर खेत में काम करने के लिए जाता था। एक महीने पहले भी खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान पीछे से कुत्ते ने उसकी पीठ पर काट लिया था। इसके बाद गंगोह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रेबीज से बचाव के लिए एआरवी का टीका लगवाया, लेकिन टीकाकरण का कोर्स पूरा नहीं कराया।
रविवार को अनीस की तबीयत बिगड़ गई। सांस फूलने लगी और पानी से डर लगने लगा। परिजन उसे लेकर फिर से सीएचसी गंगोह ले गए। वहां से डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजन ने उसे चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती कराया, जहां मंगलवार दोपहर बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। जांच में रेबीज के लक्षणों की पुष्टि हुई।
उधर, गंगोह सीएचसी प्रभारी डॉ. रोहित वालिया ने बताया कि अनीस ने कुत्ते के काटने के बाद एआरवी का केवल एक टीका लगवाया था। निर्धारित कोर्स पूरा नहीं होने से शरीर में रेबीज का संक्रमण फैल गया, जो मौत की वजह बना।
अपने भाई के मकान में रहता था अनीस
अनीस के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वह मजदूरी कर अपनी दो बेटियों और दो छोटे बेटों का पालन-पोषण करता था। उसका अपना मकान भी नहीं था और वह अपने भाई के घर में रहकर परिवार के साथ रहता था। उसकी मौत के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता और मकान बनवाने की मांग की है।
एक दिन में 150 से अधिक लोगों को काट रहे कुत्ते
जिले में प्रतिदिन 150 से अधिक लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 150 से अधिक लोग एआरवी लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में भी रोजाना 10 से 15 कुत्ते काटे के मरीज आ रहे हैं। लोगों में जागरूकता की कमी भी सामने आई है। कोर्स के अनुसार टीकाकरण नहीं करा रहे हैं। दूसरा टीका लगवाने तीसरे दिन के बजाय पांचवें दिन आ रहे हैं, जो घोर लापरवाही है। इससे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है।
कब-कब लगती है एआरवी
पहला टीका : काटने वाले दिन
दूसरा टीका : तीसरे दिन
तीसरा टीका : सातवें दिन
चौथा टीका : 28वें दिन
ऐसे करें बचाव
- कुत्ता काटने पर घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और पानी से धोएं।
- घाव पर मिर्च, हल्दी, तेल, मिट्टी या कोई घरेलू पदार्थ न लगाएं।
- तुरंत सरकारी या नजदीकी अस्पताल जाकर चिकित्सकीय सलाह लें।
- एआरवी का कोर्स बीच में न छोड़ें।
- गंभीर घाव होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन (आरआईजी) लगवाएं।
- समय-समय पर टीकाकरण कराएं।