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Saharanpur: दारूल उलूम देवबंद में महिलाओं की एंट्री पर फिर आया फरमान, जानें इस बार क्या है नया

Tue, 29 Jul 2025 08:16 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर

सार

दारूल उलूम प्रशासन का कहना है कि महिलाओं को शर्तों के साथ संस्थान के परिसर में घूमने की इजाजत दी गई थी। मगर इन शर्तों को पूरा नहीं किया जा रहा है। इसलिए फिर से महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। 
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दारूल उलूम देवबंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम देवबंद प्रशासन ने एक बार फिर से संस्था में महिलाओं का प्रवेश वर्जित कर दिया है। प्रबंधन की ओर से संस्था के मुख्य द्वार पर लगाए गए बैडिकेड पर यह निर्देश लिखवाया गया है। इसके साथ ही संस्था के अंदर किसी भी प्रकार की वीडियो बनाने और फोटोग्राफी करने पर भी रोक लगा दी गई है।
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मंगलवार को बैरिकेड पर यह निर्देश लिखे गए। इसमें संस्था में महिलाओं के प्रवेश को पूरी तरह वर्जित लिखा गया है। इसकी वजह से दारुल उलूम को देखने आने वाली महिलाओं की ख्वाहिश को फिर से झटका लगा है। क्योंकि देश के कोने कोने से महिलाएं दारुल उलूम की ऐतिहासिक इमारत, एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशीदिया और गोलाकार लाइब्रेरी को देखने के लिए यहां आती हैं। 
 

इसके साथ ही दारुल उलूम के अंदर किसी भी तरह की वीडियो बनाने और फोटोग्राफी करने, संस्था के अंदर गुटखा, तंबाकू खाकर थूकना और नशीली चीजों का प्रयोग या उन्हें अंदर ले जाने की मनाही रहेगी। जबकि फूल पौधों को छूने या तोड़ने पर भी रोक रहेगी। निर्देश में यह भी कहा गया है कि सूर्यास्त से पहले दारुल उलूम में आने वाले लोगों को संस्था परिसर से बाहर जाना होगा।
 

पिछले साल भी लगाया था प्रतिबंध
पिछले वर्ष 17 मई को संस्था में महिलाओं की एंट्री बैन की गई थी। करीब छह माह पाबंदी लगने के बाद कुछ शर्तों के साथ महिलाओं के प्रवेश को हरी झंडी दी गई थी। इसके लिए एक विजिटर पास भी बनाया गया था। जिसमें संस्था में आने वाली महिलाओं की संख्या दर्ज करनी थी। कई माह तक विजिटर पास से महिलाओं ने संस्था में प्रवेश किया। लेकिन शर्तों पर खरा न उतरने के चलते प्रबंधन ने फिर से महिलाओं के प्रवेश को वर्जित कर दिया है।



 
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ये बोले प्रभारी मोहतमिम
दारुल उलूम में महिलाएं और युवतियां रील बनाकर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करती हैं। इससे बेपर्दगी होती है और संस्था की भी बदनामी हो रही थी। पूर्व में शर्तों के साथ महिलाओं को आने की इजाजत दी गई थी, लेकिन कुछ दिन रोक के बाद रील आदि बनाने का सिलसिला फिर से शुरू हो गया। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसे देखते हुए महिलाओं का प्रवेश वर्जित किया गया है।
- मौलाना मुफ्ती रिहान कासमी, प्रभारी मोहतमिम कार्यालय, दारुल उलूम।

 
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