सहारनपुर। हरिद्वार के खुब्बनपुर निवासी नंदपाल ने अपनी पत्नी को दान विलेख के जरिये संपत्ति दान में दी। जमीन को अकृषक दर्शाकर दानपत्र पंजीकृत करा दिया। मामला जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में चला गया। जांच में तीन हजार वर्गमीटर भूमि पर अस्पताल पाया गया। साथ ही जमीन सेगमेंट में पाई गई। अदालत ने 90 लाख रुपये की स्टांप की कमी पाई। साथ ही नौ लाख रुपये अर्थदंड लगाया है।
जिला मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार चौहान की अदालत ने इसी तरह के अन्य 18 मामलों में 1.58 करोड़ रुपये की स्टांप कमी पाई है। इसके साथ ही 15.14 लाख रुपये का निबंधन शुल्क और 20.17 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया है।
शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) अजय त्यागी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट की अदालत ने 19 वादों का निस्तारण किया है। उन्होंने बताया कि इनमें एक वाद काफी बड़ा था। इसमें गांव माहेश्वरी स्थित खसरा नंबर 75 रकबा 4532 वर्गमीटर जमीन का दानपत्र नंदपाल निवासी खुब्बनपुर हरिद्वार ने अपनी पत्नी अरुणा के नाम कर दिया।
बताया कि मामला जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन रहा। जांच में सामने आया कि तीन हजार वर्गमीटर भूमि पर अस्पताल बना हुआ है। भूमि सेगमेंट रोड पर स्थित है। मौके की वास्तविक स्थिति को छिपाते हुए स्टांप अपवंचन किया गया। जिला मजिस्ट्रेट अदालत ने पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर 90.90 लाख रुपये की कमी स्टांप पाई। इसके साथ ही 10.15 लाख रुपये निबंधन शुल्क और नौ लाख रुपये अर्थदंड लगाया है।