सहारनपुर शहर के रामनगर इलाके में 2017 में जातीय हिंसा फैल गई थी। कई लोग घायल हो गए थे और वाहनों में आग लगा दी गई थी। अदालत में पेश न होने पर सांसद समेत आठ लोगों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किए गए थे।
अपर सत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ एमपी-एमएलए मीनल चावला की अदालत में चल रहे रामनगर हिंसा मामले की सुनवाई में सांसद चंद्रशेखर समेत अन्य आठ आरोपी सोमवार को पेश हुए। इस दौरान करीब 40 मिनट तक अदालत में सांसद चंद्रशेखर मौजूद रहे। उन्होंने अपने गैर जमानती वारंट रिकॉल कराए। इसके साथ ही अदालत में चार्ज फ्रेम की कार्रवाई हुई। अब साक्ष्यों में सुनवाई अदालत में जारी रहेगी।
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महानगर के रामनगर इलाके में मई 2017 में जातीय हिंसा फैल गई थी। इसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे और कई वाहनों में आग लगा दी गई थी। वादी सुधीर कुमार गुप्ता ने थाना देहात कोतवाली में तहरीर दी थी। बताया कि वह अपने प्रभारी के साथ तनाव की सूचना पर मौके पर जायजा लेने गए थे। इसी दौरान वहां पर भगदड़ मच गई। लोगों ने सभी वाहनों में आग लगा दी। इसमें उनकी मोटरसाइकिल भी जल गई। पुलिस ने हिंसा मामले में अन्य कई प्राथमिकी दर्ज भी दर्ज किए थे। इन्हीं में से एक प्राथमिकी दर्ज की सुनवाई अदालत में जारी है।
विशेष लोक अभियोजक गुलाब सिंह ने बताया कि अदालत में 14 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही है। सुनवाई में छह आरोपी अदालत में नियमित पेश हो रहे थे, जबकि सांसद चंद्रशेखर, दीपक बौद्ध, कालू उर्फ अमित, कमल वालिया, कदम सिंह, अंकित, बंटी, राजन अदालत में पेश नहीं हुए। इस पर अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किए थे। छह जून को मामले की सुनवाई हुई थी। सोमवार को सुनवाई के बाद अदालत ने अगली तारीख नौ जुलाई निर्धारित की है।
भगवान के नाम पर पहले सत्ता हासिल की, अब चंदे में की जा रही लूट: चंद्रशेखर
अदालत से बाहर निकलने के बाद सांसद चंद्रशेखर ने मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। अयोध्या मामले में कहा कि राम के नाम पर सत्ता हासिल की गई और अब उसी आस्था के नाम पर जुटाए गए धन में भी घोटाले के आरोप लग रहे हैं। इस मामले में बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। छोटों को पकड़ कर कार्रवाई दिखाई जा रही है। छोटे मामलों में एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन करोड़ों रुपये के कथित घोटाले में चुप्पी क्यों है।
उत्तराखंड दौरे को लेकर सांसद चंद्रशेखर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह हमेशा पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के अधिकारों की बात संसद में रखते हैं। उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने से रोका गया। यदि उन्हें मिलने नहीं दिया गया तो वह दिल्ली जाकर धरना देंगे। उत्तराखंड में पहले मुस्लिमों के साथ मारपीट हुई, बाद में पर्यटकों और फिर सिख समुदाय के लोगों के साथ। कुछ लोग जानबूझकर वहां माहौल खराब करने का काम कर रहे हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मंगलवार को फिर उत्तराखंड जाने की बात कही