गांव घंघोड़ के पास यमुना नदी के खाली पड़े तट पर जिला गाजीपुर के कुछ लोगों ने सब्जी की प्लेज लगाई थी। ये लोग वहीं पर निगरानी के लिए मौजूद रहे। शनिवार रात अचानक यमुना का पानी बढ़ गया और 24 लोग वहीं फंसे रह गए। एक ऊंचे टीले पर पहुंचकर मदद के लिए पुकारे। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस को सूचित किया। रात में ही एसएसपी उपेंद्र कुमार अग्रवाल पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पीएसी को भी बुलाया गया। लेकिन रात में अंधेरा अधिक होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चल सका। इसके बाद सरसावा थाना प्रभारी देवेंद्र कुमार ने गांव में कैंप किया तथा उच्चाधिकारियों को स्थिति से अवगत कराते रहे।
रविवार को दिन निकलते ही पुलिस तथा पीएसी के जवानों ने रेस्क्यू शुरू कर दिया। नाव और रस्से तथा तैरने के उपकरण और जीवन सुरक्षा के अन्य सामान के साथ जवान इन लोगों के पास तक पहुंचे। ये लोग करीब 500 मीटर की दूरी पर एक ऊंचे टीले पर शरण लिए थे। बड़ी मशक्कत से उन्हें एक-एक कर सुरक्षित निकाला गया। इनमें 12 बच्चे और 12 महिला-पुरुष थे। गांव घंघोड़ पहुंचकर सभी को खाने-पीने का सामान दिया गया। इस आपरेशन से जान बचने पर अमित कुमार सहित अन्य लोगों ने बताया कि वे मूल रूप से गाजीपुर जिले रहने वाले हैं। हर साल यमुना नदी के रेतीले मैदानों पर सब्जियां उगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। शनिवार का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन होता यदि ऊंचा टीले की शरण और सुरक्षा जवानों की मदद न मिलती। उन्होंने बचाव दल के प्रयासों पर आभार जताया। एसएसपी सहित सुरक्षा जवानों ने उन्हें चेतावनी भी दी कि यमुना के तेज बहाव के समय यहां आने का रिस्क न लें।
पीएसी ने रेस्क्यू आपरेशन से इन लोगों को बचाया
पुरूषों में अमित कुमार (30 वर्ष), उमेश कुमार (35 वर्ष), जोंगु (28 वर्ष), विद्यासागर (50 वर्ष), साहब कुमार (22 वर्ष), कमलेश (30 वर्ष), महिलाओं में कमल (23 वर्ष) पत्नि अमित, सुराही (21 वर्ष) पत्नि जोंगु, फुला (30 वर्ष) पत्नि उमेश, अंसुआ (30 वर्ष) पत्नि कमलेश, रूसी (45 वर्ष) पत्नी विद्यासागर, रेशमी (20 वर्ष) पत्नी साहब, बच्चों में विशाल ( 7 वर्ष), मुकेश (13 वर्ष), बबलू (10 वर्ष), काजल (8 वर्ष), कृष्णा (3 वर्ष), आकाश (9 वर्ष), पवन (6 वर्ष), लालू (5 वर्ष), गोलू (3 वर्ष), मोनू (7 माह), सोनम (6 माह), सनिता (1 वर्ष) को बचाया गया।