2019 में सहारनपुर देहात सीट पर बसपा के वोटों में जबरदस्त उछाल आया। बसपा को यहां पर 122304 वोट मिलें, जो 2014 के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा थे, जबकि भाजपा यहां पर केवल 70940 वोट ही पा सकी। भाजपा की हार का कारण यही विधानसभा बनी थी। यहां तक कि कांग्रेस के इमरान मसूद भी भाजपा से ज्यादा 84823 वोट ले गए थे। सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित वर्ग और मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। इस बार भाजपा ने अनुसूचित वर्ग को साधने के लिए काफी अभियान भी चलाए। इन अभियानों से भाजपा वोटरों को जोड़ने में कामयाब हो पाई या नहीं, इसका फैसला आज हो जाएगा।
सहारनपुर नगर में भाजपा रही हमेशा आगे
सहारनपुर नगर विधानसभा में भाजपा हमेशा आगे रही है। 2014 के चुनाव में यहां पर भाजपा को 133577 वोट मिले थे, जबकि 2019 के चुनाव में भाजपा ने 135840 वोट हासिल किए। यहां पर भाजपा के आगे रहने की वजह है मिश्रित आबादी। पुराने शहर में भाजपा को कम ही वोट मिलते हैं, इसकी वजह है यहां पर मुस्लिमों की संख्या अधिक होना, जबकि नए शहर में भाजपा के वोटरों में काफी उत्साह रहता है। यहां भाजपा को सबसे अधिक वोट मिलते हैं। हालांकि इस बार यहां का मतदान प्रतिशत 60.61 रहा। जो 2019 के मुकाबले कम था। अब देखना यह है कि कम मतदान प्रतिशत भाजपा को नुकसान पहुंचाता है या फिर भाजपा बाजी मारने में कामयाब होती है।
देवबंद : भाजपा, बसपा और कांग्रेस, तीनों में टक्कर
देवबंद विधानसभा क्षेत्र में तीन लाख 43 हजार 252 मतदाता है। यहां पर कुल मतदान 64.16 प्रतिशत रहा था। 2014 और 2019 के चुनाव के आंकड़े देखें तो यहां पर भाजपा को हर बार एक लाख से अधिक वोट मिला है। देवबंद विधानसभा में राजपूत समाज के कई बड़े गांव आते हैं। राजपूत समाज की नाराजगी का भाजपा पर क्या असर पड़ता है यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन अन्य गांवों के समीकरण देखें तो भाजपा ठीक स्थिति में नजर आती है। फिलहाल यहां पर बसपा और कांग्रेस तीनों में टक्कर दिखाई दे रही है।
मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में कांग्रेस, बाकी में भाजपा और बसपा भारी
बेहट विधानसभा क्षेत्र में इस बार 72.34 प्रतिशत मतदान हुआ था। मुस्लिम बाहुल्य गांवों में कांग्रेस की बढ़त दिखाई दे रही है, जबकि अन्य गांवों में बसपा और भाजपा का मिलाजुला वोटर है। 2019 के चुनाव में यहां पर बसपा को सबसे अधिक 102693 वोट मिले थे, जबकि भाजपा 91278 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर थी। कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद भी 61221 वोट ले गए थे। इस बार मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कांग्रेस बाजी पलट सकती है।
रामपुर मनिहारान : नगर में भाजपा, देहात क्षेत्र बसपा और कांग्रेस हो सकती है आगे
रामपुर मनिहारन विधानसभा भाजपा के लिए चुनौती है। पिछली बार यहां भाजपा को 89752 वोट मिले थे, जबकि सबसे अधिक बसपा को 101242 वोट मिले थे। रामपुर मनिहारान नगर क्षेत्र में कमल खिलता दिखाई दे रहा है। वहीं देहात क्षेत्र बसपा और कांग्रेस को जाता दिख रहा है। इसकी वजह है कि यहां पर भी राजपूत समाज के कुछ गांव है, जो भाजपा के विरोध में थे। इसी क्षेत्र में राजपूत समाज की एक समिति की तरफ से महाकुंभ का आयोजन किया गया था। इस विधानसभा में 316859 मतदाता है। राजपूत समाज का भाजपा की जीत-हार पर क्या असर दिखाई देता है यह तो परिणाम के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल त्रिकोणीय मुकाबला दिख रहा है।
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नकुड़ और गंगोह में भाजपा और सपा में मुकाबला, बसपा भी पीछे नहीं
नकुड़ और गंगोह विधानसभा कैराना लोकसभा के अंतर्गत आती है। यहां पर मिलाजुला असर लग रहा है। गुर्जर भाजपा की तरफ जाते दिखाई दे रहे हैं। वहीं मुस्लिम और अन्य बिरादरी कांग्रेस व बसपा की तरफ दिख रही है। इन विधानसभा में सपा प्रत्याशी इकरा हसन कांटे की टक्कर दे रहीं हैं। देखना है कि भाजपा के मौजूदा सांसद प्रदीप चौधरी वोटरों को साधने में कितना कामयाब हुए या फिर इकरा हसन बाजी मारेंगी। इन सबके बीच बसपा प्रत्याशी बाजी न मार जाए।
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