Double Murder: माधव नगर निवासी दो भाइयों आशीष और आशुतोष धीमान की 2019 में घर में घुसकर हत्या की गई थी। गोबर नाली में डालने को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। 11 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।
वर्ष 2019 में हुए दोहरे हत्याकांड में अदालत ने चार आरोपियों पति-पत्नी, बेटे और दादा को दोषी करार दिया है। सजा 11 जुलाई को सुनाई जाएगी। एक दोषी अदालत में पेश नहीं हुआ, जिसके खिलाफ अदालत ने वारंट जारी किया है।
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कोर्ट से जेल ले जाए जाते दोषी।
- फोटो : अमर उजाला
थाना कोतवाली सदर के माधव नगर निवासी आशीष धीमान और आशुतोष धीमान को उनके घर में घुसकर गोली मार दी गई थी। गोली मारने का आरोप पड़ोस के ही रहने वाले महिपाल सैनी, पत्नी विमलेश, बेटा सूरज, बेटी वर्षा, गौरव और सन्नी के ऊपर था। पुलिस ने हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मृतकों की मां उर्मिला ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। विवेचना के बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। तभी से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या 11 में जारी थी।
इस केस में बुधवार को सुनवाई हुई। महिपाल जिला कारागार में बंद था, जिसे पुलिस कड़ी सुरक्षा में लेकर अदालत पहुंची। विमलेश, जगदीश और सूरज जमानत पर थे। विमलेश और जगदीश अदालत में पेश हुए। पत्रावलियों पर आए साक्ष्यों और गवाहों को सुनने के बाद अदालत ने मुख्य दोषी महिपाल के पिता जगदीश को आर्म्स एक्ट में दोषी करार दिया। हत्या में इस्तेमाल हथियार जगदीश के नाम था।
अदालत ने मृतक आशीष और आशुतोष की माता के ऊपर जानलेवा हमले के आरोप में संदेह का लाभ देते हुए दोषियों को बरी किया है, जबकि सभी को हत्याकांड का दोषी माना है। मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता अमित त्यागी कर रहे हैं। अदालत ने तीन दोषियों को जेल भेजा, एक के वारंट जारी
अदालत ने तीन दोषियों महिपाल, विमलेश, जगदीश को जेल भेजा है। इसके अलावा सूरज के वारंट जारी किए हैं। इसी मामले में तीन आरोपियों सन्नी, गौरव और वर्षा पर केस किशोर न्यायालय में चल रहा है।
गोबर डालने को लेकर हुआ था विवाद
आशीष और आशुतोष की हत्या करने के पीछे नाली में गोबर डालने का विवाद था। इसी को लेकर पड़ोसियों में झगड़ा होता था। 18 अगस्त 2019 को दोनों भाई आशीष और आशुतोष की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी।
मूंछों को तांव देता हुआ बाहर निकला दोषी
बुधवार को अदालत ने आशीष और आशुतोष हत्याकांड मामले में फैसला दिया। फैसला सुनने के बाद जब पुलिस दोषियों को वापस जेल ले जाने लगी, तो दोषी महिपाल मूंछों को ताव देता हुआ नजर आया। उसके चेहरे पर पश्चाताप और दुख के कोई भाव नहीं दिखाए दिए।