राजीव वर्मा ने बताया कि वे पहले निर्दलीय पार्षद थे, लेकिन वर्ष 2024 में भाजपा ज्वाइन की थी। उनका आरोप है कि जीआईएस सर्वे और टैक्स वृद्धि पर पार्टी के बड़े नेता और पार्षद खामोश रहे, जिससे जनता में भारी नाराजगी है।
चार महीने से आंदोलन कर रहे पार्षदों का कहना है कि नोटिस फिलहाल व्यावसायिक भवनों को भेजे गए हैं लेकिन आगे चलकर आम नागरिकों पर भी यह बोझ पड़ सकता है। व्यावसायिक टैक्स में तो 500 गुणा तक बढ़ोतरी कर दी गई है।
पार्षदों का धरना-प्रदर्शन कई बार नगर निगम में हो चुका है, लेकिन सत्ता पक्ष की ओर से कोई ठोस कार्रवाई या प्रतिक्रिया नहीं मिली।
राजीव वर्मा के इस्तीफे की घोषणा के दौरान सपा पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा, हाजी गुलशेर, अहमद मलिक और नितिन जाटव जैसे कई विपक्षी नेता भी मौजूद रहे।