नगर निगम क्षेत्र में आने वाले व्यापारियों ने प्रतिष्ठानों का क्षेत्रफल कम होने दावा करते हुए स्वकर प्रणाली के माध्यम से टैक्स जमा कर दिया था। आशंका है कि इन लोगों ने गलत जानकारी देते हुए कम टैक्स दिया है।
स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स में कम क्षेत्रफल का दावा करने वाले करीब सात हजार व्यापारियों के व्यावसायिक भवन जांच के दायरे में आए हैं। प्रपत्र में दावा किया है कि उनके प्रतिष्ठानों का क्षेत्रफल कम है लेकिन नगर निगम की तरफ से टैक्स ज्यादा भेजा गया है। नगर आयुक्त ने सभी की जांच के आदेश दिए हैं।
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नगर निगम ने करीब डेढ़ वर्ष पहले 37,500 व्यावसायिक भवनों को जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम) सर्वे आधारित बिल भेजे थे। कई उद्यमियों और व्यापारियों ने बिल को कई गुणा तक अधिक बढ़ने की बात कहते हुए आपत्ति जताई थी। इसे लेकर नगर निगम में विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे। इसके बाद नगर निगम ने स्वकर निर्धारण प्रणाली लागू कर दी थी। बिलों से असंतुष्ट व्यापारियों और उद्यमियों से स्वकर प्रपत्र भरकर बिल जमा कराने को कहा था।
करीब पांच हजार व्यापारियों और उद्यमियों ने प्रपत्र भरकर बिल जमा कराए थे लेकिन दिसंबर 2025 में पता चला कि दिल्ली रोड स्थिति कामधेनु कॉम्प्लेक्स में औद्योगिक भवनों पर कर निर्धारण में धांधली की गई है जिन भवनों पर टैक्स लाखों में लगना था। उनके स्वामियों के साथ साठगांठ कर टैक्स हजारों में कर दिया गया। 18 दिसंबर की कार्यकारिणी की बैठक में पार्षद मंसूर बदर ने भी मामला उठाया था। इसके बाद नगर आयुक्त शिपू गिरि ने कामधेनु कॉम्प्लैक्स की सभी संपत्तियों की जांच के निर्देश दिए थे लेकिन समय के साथ जांच दबा दी गई।
इसके बाद 32,500 व्यावसायिक भवन ऐसे बचे थे जिनके स्वामियों ने न तो स्वकर प्रपत्र भरा और न ही बिल जमा कराया था। इन्हें मार्च 2026 में पुन: जीआईएस सर्वे आधारित बिल जारी किए गए। 31 मार्च तक बिल जमा कराने या स्वकर प्रपत्र भरकर बिल जमा कराने को कहा गया था। इनमें से भी करीब दो हजार लोगों ने स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराया है।
चर्चा है कि दिल्ली रोड के साथ ही जनता रोड और देहरादून रोड के कई औद्योगिक भवनों का टैक्स मिलीभगत से लाखों से घटाकर हजारों में कर दिया गया। अब नगर आयुक्त ने स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराने से संबंधित सभी व्यावसायिक भवनों की जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रभारी ने साधी चुप्पी
गृहकर एवं जलकर अनुभाग के प्रभारी/अपर नगर आयुक्त प्रथम प्रदीप कुमार यादव से इस संबंध में फोन पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद उनके सरकारी व्हाट्सएप नंबर मैसेज भेजा गया लेकिन कोई जवाब मिला।
ये बोले अधिकारी
आवासीय के साथ ही व्यावसायिक भवन स्वामियों ने स्वकर प्रपत्र भरकर टैक्स जमा कराया है। हमारी ओर से पूरी पारदर्शिता बरती गई है। सभी संपत्तियों की जांच कराने की सूचना मिली है लेकिन अभी तक नगर आयुक्त का पत्र इस संबंध में प्राप्त नहीं हुआ है। - सुधीर शर्मा, कर अधीक्षक