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ग्रामीण महिलाएं लिख रहीं कामयाबी की इबारत

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- विश्व ग्रामीण महिला दिवस -- रूपा निवासी बलियाखेडी - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। ना परिवेश समर्थन करता था और ना वैसी पढ़ाई मिली थी, बावजूद गांव की गलियों से निकलीं महिलाएं कामयाबी की इबारत लिख रही हैं। उनके पास न धन था और न ही संसाधन। सामाजिक बंधन भी बहुत थे, मगर जज्बा था कुछ कर गुजरने का। खुद आत्मनिर्भर बनना और दूसरों को स्वावलंबी बनाने की ठानकर ये महिलाएं आगे बढ़ीं। प्रस्तुत है विश्व ग्रामीण महिला दिवस पर जिले की ऐसी महिलाओं पर आधारित रिपोर्ट...
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खादी का मास्क बनाकर चमकी रूपा
एक साल पूर्व गांव बलियाखेड़ी निवासी रूपा ने स्वयं सहायता समूह बनाया, जिसमें तब सिर्फ पांच महिलाओं को जोड़ा था। अब उनसे जुड़कर 12 समूह संचालित हैं, जिसमें 110 महिलाएं जुड़ी हैं। रूपा ने बताया कि कोरोना काल में खादी के तनी वाले मास्क बनाए, जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखनऊ भिजवाए गए। करीब 10 हजार मास्क बनाकर अब तक बेच चुकी हैं। इन्हीं के साथ जुड़ी कांकरकुई की प्रियंका भी मसाले और अन्य उत्पाद बनाने का समूह चला रही हैं। दोनों महिलाओं का कहना है कि शुरुआत में इस कार्य को करने में काफी हिचक हुई, लेकिन परिवार के लोगों ने भी सहयोग किया और हम आगे बढ़ते गए।
नर्सरी उद्योग से मजबूत की आर्थिक स्थिति
गांव भाटखेड़ी निवासी सुधा ने बताया कि सात साल पूर्व तीन बीघा जमीन पर नर्सरी लगाई। महिलाओं का समूह बनाया। अब तक करीब चार लाख रुपये की आमदनी हो चुकी है। गांव की 11 महिलाएं भी समूह में जोड़ रखी हैं, जिन्हें नर्सरी से होने वाला मुनाफा उनके हिस्से के मुताबिक दिया जाता है तथा नर्सरी में निराई आदि कार्य करने पर 200 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी भी देती हैं। सुधा बताती हैं कि उनके पति भी नर्सरी उद्योग से जुड़े हैं, लिहाजा पति का भी पूरा सहयोग उन्हें मिला है।
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बाधाएं आईं पर कमजोर नहीं पड़ा ऊषा का जज्बा
छुटमलपुर। शिव कॉलोनी की उषा देवी ने दस साल पूर्व शाकंभरी महिला एवं विकास संस्थान की नींव रखी। इसके तहत दस स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं। इनसे करीब 125 महिलाएं जुड़ी हैं। संस्था के दो सिलाई सेंटर भी संचालित हैं। अचार, पापड़, कचरी, मट्ठी, दाल की मंगोड़ी आदि खाद्य उत्पाद बनाती हैं। उत्पादों को बेचने के लिए स्टोर भी खोल रखा है। इसे भी महिलाएं ही चलाती हैं। उषा देवी ने बताया कि 500 रुपये की राशि से समूह के माध्यम से महिलाओं के खाते खोलकर बचत की आदत भी विकसित की है। मूलत: टिहरी गढ़वाल की रहने वाली ऊषा ने शिक्षा पूरी होने के बाद 17 साल तक भुवनेश्वरी महिला संस्थान में नौकरी की है। दो साल पूर्व उनके पति रविंद्र की मृत्यु हो गई, मगर स्वावलंबी बनने और दूसरों को जागृत करने का जज्बा कम नहीं हुआ।
4700 समूहों से जुड़ीं हैं 51533 महिलाएं
सहारनपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उप आयुक्त अरुण उपाध्याय और जिला प्रबंधक अनुज सिंह ने बताया कि जिले में 4700 स्वयं सहायता समूह संचालित हैं, जिनसे 51533 महिलाएं जुड़ी हैं। ग्रामीण परिवेश में रहने वाली यह महिलाएं खुद भी आत्मनिर्भर बन रही हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रही हैं। जिले में नौ समूह ऐसे हैं, जो नर्सरी, मास्क, स्कूल ड्रेस, मसाला बनाने आदि कार्य प्रमुखता से कर रही हैं और उनके उत्पादों की बिक्री भी बढ़ रही है।

- विश्व ग्रामीण महिला दिवस -- प्रियंका निवासी कांकरकुई- फोटो : SAHARANPUR

- विश्व ग्रामीण महिला दिवस -- सुधा निवासी भाटखेड़ी- फोटो : SAHARANPUR

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