फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनामिका शुक्ला की नियुक्ति में ताक पर रखे गए नियम

विज्ञापन
विज्ञापन
अनामिका शुक्ला की नियुक्ति में ताक पर रखे गए नियम
विज्ञापन

सहारनपुर। चर्चित और कथित शिक्षिका अनामिका शुक्ला की कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मुजफ्फराबाद में नियुक्ति में नियमों को ताक पर रखा गया। अनामिका को नियुक्ति देने में अधिकारियों की मिलीभगत होने की पूरी आशंका है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिला समन्वयक और संबंधित वार्डन को नोटिस भेजा है।
कथित अनामिका शुक्ला पुत्री सुभाषचंद शुक्ला निवासी गांव हसनपुर जिला मैनपुरी ने सहारनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में दिसंबर 2019 में ज्वाइन किया था। जब अनामिका द्वारा दिए गए पते पर ज्वाइनिंग लेटर भेजा गया तो गांव हसनपुर जिला मैनपुरी में इस नाम की कोई महिला नहीं होना बताया गया। इसके बाद ज्वाइनिंग लेटर वापस आ गया। इसके बावजूद अनामिका को सहारनपुर में ज्वाइनिंग दी गई, जो बड़ा सवाल है। इतना ही नहीं, संबंधित अधिकारियों द्वारा बिना बीएसए को संज्ञान में लिए अनामिका के लिए पद संयोजित किया गया। बिना मूल अभिलेखों के बावजूद अनामिका के नाम से प्रत्येक माह मानदेय निकाला जाता रहा। बीएसए ने प्रथम दृष्टया अनामिका के लिए विद्यालय में पद संयोजित करने से लेकर नियुक्ति और मानदेय निकलवाने तक में जिला समन्वयक आदित्य नारायण शर्मा और वार्डन की लापरवाही मानी है। ऐसे में दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दस जून तक जवाब देने को कहा गया है। अन्यथा की स्थिति में दोनों के विरुद्घ दंडात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
विज्ञापन

निदेशक के आदेश भी तक पर रखे
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की पारुल उत्तम नाम की शिक्षिका ने 21 जुलाई 2019 को राज्य परियोजना निदेशक (सर्व शिक्षा अभियान) को तीन पेज का शिकायती पत्र भेजा था। पारुल ने सहारनपुर में सर्व शिक्षा अभियान के तहत फर्जी नियुक्तियों, फर्जी बिलों के भुगतान, धन उगाही, फर्जी एलटीसी और अन्य तरह के गंभीर आरोप लगाए थे। राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने 16 अक्तूबर 2019 को एडी बेसिक को पत्र लिखकर मामले की जांच कराकर एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने को कहा था। इसके बावजूद गड़बड़ियां रुकने की बजाय बढ़ती गईं। जो अन्य अधिकारियों की मिलीभगत होने की ओर भी इशारा करती हैं।
जिला समन्वयक पर गंभीर आरोप
जिला समन्वयक (बालिका शिक्षा) पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डनों और शिक्षकों के उत्पीड़न का आरोप भी पारुल उत्तम ने लगाया था। राज्य परियोजना निदेशक को भेजे पत्र में उन्होंने नकुड़ की एक वार्डन के उत्पीड़न का जिक्र किया था, जिसमें वार्डन को जिला समन्वयक से तंग आकर त्याग पत्र देना पड़ा था। इतना ही नहीं, जिला समन्वयक पर एक खास महिला को फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर वार्डन पद पर नियुक्त करने की शिकायत भी की गई थी। मामले में जांच भी बैैठी थी, जिसका परिणाम आज तक नहीं आया है। प्रत्येक कस्तूरबा गांधी विद्यालय से हर माह 15 से 20 हजार रुपये की उगाही करने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। इनके अलावा बालिकाओं को मिलने वाले भोजन और अन्य सामग्री में भी धांधली होने की बात कही गई थी।
अनामिका की नियुक्ति सही: आदित्य
इस बारे मेें जिला समन्वयक आदित्य नारायण शर्मा का कहना है कि अनामिका शुक्ला की सहारनपुर में नियुक्ति पूरी तरह से नियमानुसार है। अनामिका का ज्वाइनिंग लेटर वापस आने की वजह लिपिकीय त्रुटि थी। बीते वर्ष राज्य परियोजना निदेशक से की गई शिकायत में लगे गंभीर आरोपों पर उनका कहना है कि एडी बेसिक ने जांच की थी, जिसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी और वह पूरी तरह बेकसूर हैं।
विज्ञापन

वर्जन
अनामिका शुक्ला के प्रमाण पत्र रंगीन फोटो कॉपी निकले हैं। अनामिका को ज्वाइन कराने में संबंधित अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो रही है। ऐसे में जिला समन्वयक और वार्डन को नोटिस जारी किया है। यदि जवाब नहीं मिलता है तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- रमेंद्र कुमार सिंह, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें