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शुगर की जांच करवाने से नहीं टूटता रोजा

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शुगर की जांच करवाने से नहीं टूटता रोजा
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सहारनपुर। शुगर की जांच कराने से रोजा नहीं टूटता है। यह कहना है जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम मौलाना कारी इसहाक गोरा का। उनकी निगरानी में चल रही रोजेदारों की हेल्पलाइन पर मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोगों ने सवाल पूछकर अपनी शंकाओं का शरीयत की रोशनी में समाधान करवाया।
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रोजेदारों को बताया गया कि इस्लाम धर्म में पूरे एक माह का रोजा रखना मुसलमानों पर अनिवार्य है। इसका स्वरूप बहुत कठिन है। जिसमें किसी भी भोज्य का कोई कण या किसी भी पेय पदार्थ की कोई बूंद हलक से नीचे ना चली जाए, लेकिन इस माह की कठिन तपस्या का मानव जीवन और सामाजिक समानता स्थापित करने में फायदे बहुत से हैं। कोई रोजे से हो तो उसको गाली-गलौज, गीबत और हसद नहीं करनी चाहिए। शोर नहीं मचाना चाहिए, अगर कोई आदमी उसको गाली भी दे, या उससे लड़ना चाहे तो उसका जवाब सिर्फ यह होना चाहिए कि भाई मैं रोजेदार आदमी हूं।
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पूछे गए सवाल और उनके जवाब
सवाल - मेरठ निवासी जकीउल्लाह ने पूछा कि वह शुगर के रोगी हैं, रोजे की हालत में शुगर की जांच करवाने से रोजा तो नहीं टूट जाएगा ?
जवाब - जी नहीं। शरीयत के अनुसार अगर कोई व्यक्ति रोजे की हालत में शुगर की जांच करवाता है तो उससे रोजा नहीं टूटता।
सवाल - मुजफ्फरनगर के खालापार निवासी गोहर आलम ने मालूम किया कि क्या रोजे की हालत में होंठ फटने पर वैसलीन लगा सकते हैं, इससे रोजा तो नहीं टूटता ?
जवाब - रोजे की हालत में होठों पर वैसलीन लगा सकते हैं, परंतु इस बात का ख्याल रहे कि उसका अंश हलक में ना उतरे।
सवाल - आली चुंगी निवासी अबुर्रहमान सिद्दीकी ने मालूम किया कि शरीयत के अनुसार बगैर सहरी के रोजा रखना कैसा है ?
जवाब - सहरी करना रोजे के लिए मुस्ताहब है बगैर सहरी के भी रोजा हो जाता है।
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