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लागत अधिक, कीमत कम, किसान घाटे में धान बेचने को मजबूर

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लागत ज्यादा, कीमत कम, घाटे में धान बेचने को मजबूर किसान
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सहारनपुर। धान की फसल की कटाई शुरू हो गई है। फसल पैदावार जितनी लागत आई, उससे भी कम दाम मिल रहा है। किसान को जरूरत है पैसों की तो, मजबूरी में कम कीमत पर भी धान बेचना पड़ रहा है। मंडी के बाहर मोटा धान बिक्री करने पर एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भी नहीं मिल पा रहा है। बासमती धान पूसा 1509 का मंडी में 1400 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। जबकि पिछले सीजन में इस प्रजाति का भाव 2300 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल था। डिमांड में कमी के चलते व्यापारी भी या तो धान की खरीद नहीं कर रहे हैं या फिर कम भाव दे रहे हैं। अनुमान के तौर पर एक बीघा धान की पैदावार में करीब 6500 से 7000 रुपये की लागत है, जबकि धान उत्पादन एक बीघा में करीब चार क्विंटल का है। इस लिहाज से लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
किसानों की पीड़ा
पुवांरका क्षेत्र के गांव गंगाली निवासी किसान रामपाल सिंह पुंडीर ने बताया कि मोटे धान और बासमती में 1121 की छह बीघा फसल लगाई थी। पांच दिन पहले धान की छिताई भी करा दी, लेकिन अब तक खरीदार नहीं मिला। सरकार तत्काल धान खरीद की व्यवस्था कराए। गेहूं की फसल बुआई के लिए खाद और बीज की आवश्यकता है।
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मुजफ्फराबाद के गांव दाऊदपुरा निवासी डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 50 बीघा मोटा धान लगाया था। अब तक खरीददार नहीं मिला है और ना ही सरकारी क्रय केंद्र खुले हैं। ऐसे में उनके पास फसल को स्टोर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। सरकारी केंद्र पर ही इसे बेचा जाएगा।
नागल के गांव नगली मेहनाज निवासी प्रवीण कुमार का कहना है कि बासमती धान की 1509 प्रजाति लगा रखी थी। पिछले वर्ष 2600 रुपये प्रति क्विंटल बिका था, लेकिन इस बार मजबूरी में 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिका है। इस कारण लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।
चिलकाना के किसान शोपाल कांबोज ने बताया कि धान का मंडी में मूल्य पिछले वर्ष की अपेक्षा काफी कम है। मोटे धान की उपज तो ठीक है, लेकिन बाजार में मूल्य 1300 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। अब क्षेत्र के अधिकांश किसानों को सरकारी धान क्रय केंद्र के खुलने का इंतजार है।
नानौता के रोबिन जैन ने बताया कि बासमती धान की 1509 प्रजाति लगा रखी थी। व्यापारियों द्वारा कम रेट लगाने के कारण हरियाणा में जाकर 1600 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचना पड़ा है। मोटे धान को लेकर चिंता है, क्योंकि व्यापारी मोटे धान को मात्र 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल में ही खरीद रहे हैं।
बड़गांव के ऋषिपाल सिंह का कहना है कि करीब 15 दिन पहले कटी उनकी धान की फसल अभी बिक नहीं सकी है। इस कारण धान के किसान को घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
एक बीधा धान पर होने वाला अनुमानित खर्च काफी आ जाता है, जबकि मंडी में धान का भाव काफी कम मिल रहा है।
गांव नंदी फिरोजपुर के प्रगतिशील किसान विनोद कुमार का कहना है कि एक बीघा धान का उत्पादन करने में किसान का करीब 6500 से 7000 रुपये तक अनुमानित खर्च आ जाता है। इसमें बीज, कीटनाशक, उर्वरक, रोपाई मजदूरी, कटाई आदि की औसत लागत शामिल हैं। बाजार में काफी कम है।
हरियाणा की मंडियों में जाती है बासमती
जिले के बडे़ किसान और ग्राम व्यापारी बासमती को बेचने के लिए हरियाणा की विभिन्न मंडियों में भी जाते हैं। जिले के लोग करनाल, यमुनानगर, तरावडी और इंद्री आदि की मंडियों में बासमती धान बेचने के लिए जाते हैं।
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एक अक्तूबर से होगी 17 क्रय केंद्रों में धान की सरकारी खरीद
सहारनपुर। मोटे और सामान्य प्रजाति के धान की खरीद के लिए जिले में 17 खरीद केंद्र लगेंगे। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य कॉमन धान का 1868 रुपये और ग्रेड-ए धान का 1888 रुपये प्रति क्विंटल घोषित कर रखा है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी प्रिंस चौधरी ने बताया कि कैलाशपुर, टाबर, चिलकाना, गंगोह, सांगाठेडा एट महंगी, भायला और हलवाना में पीसीएफ धान की खरीदारी करेगा। खाद्य विभाग सहारनपुर मंडी, पुंवारका, नकुड़, सरसावा, गंगोह नवीन मंडी, रामपुर मनिहारान मंडी, देवबंद मंडी और भारतीय खाद्य निगम सहारनपुर मंडी और नकुड़ में धान की खरीद करेगा। इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर सभी तैयारी कर ली गई हैं।
जिले में धान आंकड़ों की नजर में
जनपद में धान का कुल रकबा ---------- 60 हजार हेक्टेयर
मोटा एवं सामान्य धान का रकबा ----- 12 हजार हेक्टेयर
बासमती धान का क्षेत्रफल ------------ 48 हजार हेक्टेयर
सहारनपुर मंडी में गत वर्ष बासमती धान खरीद -- 242561 क्विंटल
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