पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो ने रैली के जरिये आरक्षण को हथियार बनाकर भाजपा और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दोनों पार्टियों पर आरक्षण को खत्म करने का षड्यंत्र रचने, उत्पीड़न करने एवं नौकरियों में पदोन्नति के आरक्षण को समाप्त करने के प्रयास का आरोप लगाकर दलितों को रिझाने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस आरक्षण की बात कह रही है। कभी भाजपा नेता तो कभी कांग्रेस नेता दलित और गरीबों के घर जाकर खाना खा रहे हैं, खाट बैठक कर रहे हैं लेकिन गरीबों के आरक्षण को खत्म करने का प्रयास दोनों ने ही किया है।
उन्होंने कहा कि दलितों, आदिवासियों एवं अन्य पिछड़े लोगों को बाबा साहेब अंबेडकर के अथक प्रयासों से संविधान में आरक्षण एवं इन लोगों को अन्य जो भी आवश्यक सुविधाएं मिलीं हैं। उन्हें भी अब केंद्र की सरकार भाजपा ने आरएसएस के एजेंडे के मुताबिक चलकर इनकी समीक्षा करने की आड़ में इन्हें खत्म करने का प्रयास किया है।
उससे पहले भी जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी उस दौरान सुप्रीम कोर्ट में कुछ लोगों ने पदोन्नति में आरक्षण खत्म करने के खिलाफ गए। जिसमें कोर्ट ने कांग्रेस को भी पार्टी बनाया था लेकिन कांग्रेस सरकार ने कोई पैरवी नहीं की।
उसके बाद बसपा ने इस मामले को दोनों सदनों में उठाया। राज्यसभा में इस आरक्षण को संघर्ष के बाद पास करा दिया गया लेकिन लोकसभा में कांग्रेस, भाजपा एवं अन्य विरोधी पार्टियों की मिलीभगत के कारण यह विधेयक पास नहीं हो सका। अब केंद्र में भाजपा की सरकार है, लेकिन अब भाजपा सरकार ने भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
भाजपा शासित प्रदेशों में तो इनकी हीन एवं जातिवादी भावना के चलते अधिक शोषण हो रहा है। दलित छात्र रोहित बेमुला कांड, गुजरात का दलित कांड एवं यूपी के भी कई मामले शामिल हैं।
अब भाजपा सरकार बाबा साहेब डा. बाबा अंबेडकर के जीवन से जुड़े कुछ स्थानों को स्मारक एवं संग्रहालय में परिवर्तित करने की मात्र घोषणा करने से वह लोगों को कांग्रेस की ही तरह गुमराह कर रहे हैं। लोगों के घरों में जाकर खाना खाने से दलित समाज का पिछड़ापन एवं उत्पीड़न खत्म होने वाला नहीं है।