सहारनपुुर जिलाधिकारी ने कहा है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान है। लोगों के द्वारा दिया गया रक्त न सिर्फ मरीजों की जिंदगी बचाता है, बल्कि आपसी भेदभाव को भी दूर करता है।
रक्त सभी को जोड़ता है। रक्त को किसी मशीन से नहीं बनाया जा सकता। सिर्फ इंसान ही दूसरे इंसान को रक्त देकर जीवन की रक्षा कर सकता है।
डीएम पवन कुमार मंगलवार को अमर उजाला द्वारा एसबीडी जिला अस्पताल में लगाए गए रक्तदान शिविर के उद्घाटन करने के बाद आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से यह कम नहीं होता, बल्कि जल्द ही नया बन जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी मो. सईद ने रक्तदान से संबंधित जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि लोग रक्त के जरूरतमंद व्यक्ति चिकित्सालय के ब्लड बैंक में स्वयं रक्तदान कर हेमोफीलिया, थेलेसीमिया, कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों, दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों को रक्तदान कर व्यक्ति का जीवन बचाने में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि व्यवसायिक रक्तदाताओं से नहीं ब्लड बैंक से ही जांचा हुआ रक्त लें। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशा शर्मा ने कहा कि मानवीय रक्त का कोई विकल्प नहीं है।
रक्त को कृत्रिम विधि से भी उत्पादित नहीं किया जा सकता। उन्होंने गर्भवती महिलाओं की रक्त के अभाव में होने वाली मृत्यु को कम करने के लिए रक्तदान को प्रोत्साहन करें। प्रतिवर्ष 45 से 80 लाख रक्त यूनिटों की आवश्यकता पड़ती है।
जबकि काफी प्रयासों के बाद सिर्फ 50 लाख यूनिट रक्त ही एकत्रित हो पाता है। रक्तकोष प्रभारी डॉ. प्रियंका प्रभाकर ने कहा कि रक्त सबको जोड़ता है। रक्तदाताओं द्वारा दिया गया रक्त मरीजों की धमनियों में जीवनदान बनकर दौड़ रहा है।
स्वैच्छिक रक्तदाता ही दूसरों के जीवन का मुख्य आधार हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश जैन ने कहा कि खून की एक बूंद भी किसी को जीवन दे सकती है। 19 से 60 वर्ष का कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है।
उसका वजन 45 किलो से अधिक होना चाहिए। 350 से 450 एमएल तक रक्तदान के पश्चात रक्त की आपूर्ति 24 घंटे में ही हो जाती है। संगोष्ठी में एनसीसी के मेजर अश्वनी कुमार भारद्वाज, कुलभूषण ने भी संबोधित किया।
गोष्ठी का संचालन शशि कुमार सैनी ने किया। डॉ. जीके निगम, डॉ. प्रवीण कुमार और डॉ. प्रियंका प्रभाकर ने लोगों का आभार जताया। प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
गोष्ठी में देव कुमार, संत कमल किशोर, डॉ. हर्ष, विनीत चौहान, नरेंद्र मदान, महेशिवा, राजन शर्मा, वैभव कांबोज, मनमोहन कृष्ण, रीमा सेठ, कंवल लूथरा, दीपा चौहान, रमेश शर्मा, जितेंद्र सिंह, अंजलि देव खुल्लर, जितेंद्र सिंह, पंकज पांचाल, जेपी चाहर, जुनेद, आरिफ अली, विवेक
तायल, अजय गुलाटी, अनिल, सीपी सिंह, जसवीर सिंह गंभीर, सन्नी अग्रवाल, संयम तनेजा, बिजायेश हलदार, विपुल महेश्वरी, प्रेमलाल, देवेंद्र चौहान, वैभव गुप्ता, हार्दिक खुराना, डॉ. कुलदीप, पुनीत चौहान, सुमित आर्य, देशपाल, सावन कुमार, सुधीर कुमार, परस सिंह को डीए ने प्रशस्ति
दिए। देवेंद्र सिंह, प्रमील चौधरी, अवनीश कुमार, अमित मक्कड़, मुकुंद मनोहर गोयल, नीतीश प्रकाश, अतुल नैब, दीपक गुप्ता, नरेश अहूजा, तरुण प्रकाश, बिशनपाल, भूपेंद्र कुमार, अनुराग यादव, अंकित यादव, श्रीराम सैनी, आशीष राणा, मनीष, सुंदर कुमार, अंकित शर्मा, रोहित कुमार, दीपक
यादव, शिवम सिक्का, मनोज कुमार, विपिन कुमार, आरपी शर्मा, रजत सैनी, तरुण अग्रवाल, कुशलपाल सिंह, नैना कश्यप, प्रदीप सरोही, अनुज स्वामी, भारत गर्ग, शिव कुमार, मनोज राणा, तुषार खुराना, परमजीत सिंह, कपिल सैनी, राजू त्यागी, प्रवीण कुमार, अंजनी देव खुल्लर, नरेंद्र
कुमार, अखिलेश सिंह, नरेंद्र सिंह रावत, हिमांशु प्रकाश, राहुल तोमर, अंकित मलिक, अमरीश, विकास पंवार, विवेक गर्ग, ंकित मलिक, रोहित सैनी, तरुण गुलाटी, सुनील गुलाटी, वैभव गुप्ता, आदिम महात्रे और जसवीर सिंह।