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धार्मिक स्वतंत्रता हमारा सांविधानिक अधिकार है, इस पर कोई समझौता नहीं: मदनी

Fri, 27 Mar 2026 01:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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मौलाना महमूद मदनी।
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देवबंद(सहारनपुर)। वंदेमातरम के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से व्यक्त किए गए रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जमीयत का यह स्पष्ट और सिद्धांतगत मत है कि वंदेमातरम हमारे मूल आस्था तौहीद के विरुद्ध है। इसलिए किसी भी आदेश या निर्देश के माध्यम से इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
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मौलाना महमूद मदनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसी भी नागरिक को उसके धर्म, आस्था और अंतरात्मा के विरुद्ध किसी कार्य के लिए मजबूर करना न केवल सांविधानिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है, बल्कि संविधान की मूल संरचना पर सीधा आघात भी है। मौलाना मदनी ने जोर देकर कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण संरक्षण प्रदान करता है, जिसे किसी भी प्रशासनिक निर्देश, सरकारी दबाव या सामाजिक दबाव के माध्यम से छीना नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा कि बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 28 जनवरी 2026 को वंदेमातरम के संबंध में जारी सरकारी दिशा-निर्देश केवल सलाह (एडवाइजरी) है, उनकी कोई बाध्यकारी प्रकृति नहीं है और उनके उल्लंघन पर कोई दंडात्मक प्रावधान भी नहीं है। मौलाना मदनी ने चेतावनी दी यदि देश के किसी भी हिस्से में किसी व्यक्ति, छात्र या संस्था को इस मामले में बाध्य किया गया या उसके धार्मिक एवं सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया तो जमीयत अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और हर संभव कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
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