सहारनपुर। किराये पर संपत्ति को देने के बाद किसी भी तरह से विवाद न हो। इसके लिए किरायेनामे को स्टांप एवं पंजीयन विभाग में पंजीकृत कराया जा सकता है। शासन ने पंजीयन शुल्क में भी कमी की है। इससे भविष्य में होने वाले विवादों से छुटकारा मिलेगा। जिले में हर महीने स्टांप एवं पंजीयन विभाग में करीब 210 किरायेनामे पंजीकृत होते हैं।
स्टांप एवं पंजीयन विभाग द्वारा किरायेनामे पर लगने वाले शुल्क की दरें जारी की गई है। दो लाख रुपये तक के वार्षिक किराये पर एक वर्ष की अवधि तक एक हजार रुपये शुल्क जमा कराना होगा। इसी तरह एक से पांच वर्ष तक के किरायेनामे पर यह दो हजार व पांच से दस वर्ष तक चार हजार रुपये जमा कराने होंगे। दो लाख से छह लाख रुपये तक के औसतन किराये पर एक वर्ष के लिए तीन हजार, एक से पांच वर्ष के लिए छह व पांच से दस वर्ष तक का शुल्क आठ हजार रुपये निर्धारित है। छह से दस लाख रुपये वार्षिक किराये पर एक वर्ष तक साढ़े चार हजार, एक से पांच वर्ष तक दस व पांच से दस वर्ष की अवधि तक 13 हजार रुपये शुल्क देना होगा।
- किरायेनामों के वादों में आएगी कमी
किरायेनामा पंजीकृत होने के बाद विवादों में भी कमी आएगी। कई बार किराये की अवधि, राशि और संपत्ति खाली करने को लेकर विवाद भी हो जाता है। ऐसे में संपत्ति को लेकर विवाद न्यायालय में पहुंचता है। इसके निपटारे में कई बार काफी समय लग जाता है। ऐसे में किरायानामा पंजीकरण होने से इस तरह की परेशानियों से बचा जा सकेगा। अधिकारियों की अदालतों में वर्तमान में करीब 437 किरायेनामे के वादों की सुनवाई चल रही है।
संपत्ति को किराये पर देते समय सभी स्टांप एवं पंजीयन विभाग में पंजीकरण अवश्य कराए। शासन की ओर से शुल्क को काफी कम कर दिया गया है। इससे भविष्य में होने वाले विवादों से भी बचा जा सकेगा।
- बृजेश एस चौधरी, एआईजी स्टांप