सहारनपुर में प्रदेश सरकार द्वारा निजी नलकूप एवं ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू विद्युत दामों में की गई वृद्धि को लेकर भाकियू ने जिले में तहसील मुख्यालयों पर धरना देकर बढ़ी बिजली दरों को वापस लिए जाने की मांग र्की। धरने के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों को सीएम को संबोधित ज्ञापन भी सौंपे गए।
रामपुर मनिहारान में धरने को संबोधित करते हुए चौधरी जगपाल ने कहा कि प्रदेश में योगी सरकार द्वारा 50 से 150 प्रतिशत तक की विद्युत दामों में की गई वृद्धि से जहां किसान की कमर टूट जाएगी वहीं आम जनता के सामने भी संकट खडा हो जाएगा। कहा कि देश के अन्य राज्यों में किसानों को उत्तर प्रदेश से सस्ती विद्युत उपलब्ध कराई जाती है।
उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि वह विद्युत दर वृद्धि को वापस ले अन्यथा किसान बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। बाद में किसानों ने प्रदेश मुख्य मंत्री को संबोधित अपनी आठ मांगों को लेकर एक ज्ञापन एसडीएम राकेश कुमार गुप्ता को सौंपा। प्रदीप कुमार, ताराचंद, अशोक ठाकुर, शेरपाल, किरनपाल, जगदीश, देवेंद्र कुमार, इदरीश, चतरपाल, सेवाराम, वीरपाल, इस्लाम, सुरेंद्र कुमार, पवन सिंह रहे।
नकुड़ में तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर बढ़े हुए दामों को वापस लिए जाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। जिला महासचिव अशोक डाल्लेवाला के नेतृत्व में ब्लाक प्रांगण में एकत्रित हुए। जहां से बिजली की दरों में बढ़ोतरी के विरोध में नारेबाजी करते हुए किसान तहसील कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए।
किसानों का कहना था कि जब तक सरकार बिजली की बढ़ी कीमत को कम नहीं करेगी तब तक किसान धरने प्रदर्शन को बाध्य होंगे। तहसीलदार रामदयाल रमन ने धरना स्थल पर पहुंचकर भाकियू कार्यकर्ताओं की मांगों सुना। महीपाल सिंह, प्रदीप ठाकुर, डा. इदरीश अहमद, राजपाल सिंह, संजय चौधरी, ब्रजपाल सैनी, कमलेश, सिताबसिंह, अमरीश, विकास कुमार, इरशाद रशीद, सेठपाल, करण सिंह मौजूद रहे।
बेहट में जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली के दामों में की गई 50 से 100 प्रतिशत की वृद्धि से किसान एवं मजदूर की कमर टूट गई है। किसी भी वस्तु का रेट थोक मूल्य सूचकांक या महंगाई दर के आधार पर तय किया जाता है। किसानों की फसलों के मूल्य में महंगाई दर से भी कम वृद्धि की जाती है, जिसका उदाहरण हाल ही में गन्ना, धान गेहूं के दामों में की गई वृद्धि है।
बिजली की दरों में 50 प्रतिशत की वृद्धि से किसानों की लागत में भारी वृद्धि होगी और किसानों की कमर टूट जाएगी। तहसील अध्यक्ष घनश्याम राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार की इस बिल वृद्धि से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों पर कर्ज का भार बढ़ेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
ज्ञापन में बिजली की दरों में की गई वृद्धि को अविलंब वापस लिए जाने, एनजीटी के पुराने वाहनों पर आदेश से ट्रैक्टर को मुक्त कराए जाने, सभी तरह के वाहनों की समय सीमा 15 वर्ष किए जाने, भाजपा के घोषणा पत्र के अनुसार किसानों की फसल लागत मूल्य से 50 प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का फार्मूला लागू किए जाने, फसलों के न्यूनतम मूल्य से नीचे की खरीद को अपराध माने जाने, फलों सब्जी एवं दूध को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधीन लाए जाने, प्रदेश में आलू, गन्ना, धान के किसानों को बोनस दिए जाने, आंदोलन के दौरान किसानों पर हुए सभी मुकदमें वापस लिए जाने की मांग की गई।
पंचायत की अध्यक्षता मास्टर वीरेंद्र सिंह एवं संचालन मास्टर रघुबीर सिंह ने किया। पंचायत में ब्लाक अध्यक्ष राशिद, बबली, सुरेंद्र कांबोज, प्रधान खुर्शीद अहमद, प्रधान मोहम्मद आलिम, मनोज चौधरी, डॉ. राजवीर, लुकमान, सुरेश चौहान, मेघराज सिंह, हमीद, प्रमोद कुमार, साजिद रहे।
देवबंद। भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी और गन्ना मूल्य भुगतान समेत अन्य समस्याओं को लेकर शुक्रवार को तहसील मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। बाद में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई।
यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के आह्वान पर कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन किया। प्रदेश उपाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बिजली की दरों में बेतहाशा वृद्धि कर आमजन की कमर तोड़कर रख दी। किसानों को समय से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
इस कारण किसान बेहद परेशान हैं। यूनियन नेताओं ने एसडीएम रामविलास यादव को पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इसमें निजी नलकूपों एवं घरेलू बत्ती पंखा पर की गई बढ़ोतरी को वापस लेने, सरकार के निर्देशानुसार चीनी मिलों से गन्ना मूल्य का भुगतान कराने, किसानों की विभिन्न देयों के बकाया में भूमि नीलामी का प्रक्रिया रोकने, विद्युत बकाया में थानों में दर्ज कराई जा रही एफआईआर को बंद कराने
और किसानों को फसलों की लागत में मुनाफा जोड़कर मूल्य देने की मांग की गई। किसानों ने एक अन्य ज्ञापन में तलहेड़ी और नागल के बीच में संपर्क मार्गों के लिए रास्ता दिलाने की मांग की गई। अध्यक्षता चौधरी यशपाल सिंह व संचालन ईश्वर चंद आर्य ने किया। इस मौके पर विनित त्यागी, अनुज सिंह, भूपेंद्र त्यागी, राजेश त्यागी, बिजेंद्र कुमार, असलम, केहर सिंह आदि किसान मौजूद रहे।