छुटमलपुर (सहारनपुर)। गांवों की फिजा में चुनावी शोर घुला हुआ है। भरी दोपहरी में धूल और कीचड़ भरे रास्तों तथा देर रात तक खराब स्ट्रीट लाइटों के बीच अंधेरी गलियों से होकर चुनाव प्रचार तो मंजूर है लेकिन जीतने के बाद इस तस्वीर को बदलने की कोशिश नहीं की जाती। गांव-गांव कीचड़ से अटी पड़ी नालियां, आबादी के बीच लगे गंदगी के ढेर, दूषित पेयजल उगल रहे हैंडपंप, अवरुद्ध जल निकासी, शमशान घाट के बदहाल रास्तों की समस्याएं तस की तस है। मुजफ्फराबाद ब्लाक के गांवों के हालात पर एक रिपोर्ट
बुखार से दर्जन भर मौतों के बाद भी नहीं ली सीख
मुजफ्फराबाद ब्लाक की 5000 की आबादी वाली ग्राम पंचायत बेहड़ा खुर्द में जल निकासी बड़ी समस्या है। नालियां कचरे से अटी हैं। तालाबों पर अवैध कब्जे हैं। बारिश के बाद सड़कों पर जलभराव हो जाता है। हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं। आबादी के बीच कूड़े के ढेर लगे हैं। दो साल पहले गांव में डेंगू से दर्जन भर से ज्यादा मौतें हुई थी जिनकी गूंज लखनऊ तक सुनाई दी थी। उस वक्त जिले के प्रभारी मंत्री ने भी गांव का भ्रमण कर समस्याओं के निदान का भरोसा दिलाया था। गांव के इब्राहिम, संजय कुमार, कर्मचंद, वकील ठेकेदार, नसीम अहमद, सुमित आदि का कहना है चुनाव फिर आ गए और समस्याएं ज्यों की त्यों है।
खेल मैदान के पास लगे हैं कूड़े के ढेर
कमालपुर 4000 जनसंख्या की मिश्रित आबादी की पंचायत है। गांव में 80 फीट की गहराई पर लगे हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं। सरकारी नल गिनती के हैं, टंकी भी नहीं है। श्मशान घाट का रास्ता कच्चा है, जिस पर बरसात में पानी भरने से कीचड़ हो जाता है। स्ट्रीट लाइटें पांच साल पहले लगाई गई थी जो अब खंभों से भी उतर चुकी हैं। गांव में प्रवेश करते ही खलिहान की जमीन है, जिस पर बच्चे और युवा खेलते हैं लेकिन यहां कूड़े के ढेर लगे हैं। एक तिहाई रास्ते भी खस्ताहाल हैं। गांव के विजय राणा, दीपक राणा, बंटी सैनी और शुभम चौधरी का कहना है कि गांव के बड़ वटवृक्ष के सुंदरीकरण, बरातघर के निर्माण और खेल मैदान की सफाई की मांग लंबे अरसे से की जा रही है।
20 गांवों को जोड़ने वाले रास्ते पर जमा है कीचड़
ढाई हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत अलीपुर संभालकी के बीच से हलवाना जाने वाले रास्ते का सौ मीटर हिस्सा एकदम कच्चा है जिस पर कीचड़ और पानी भरा रहता है। यह रास्ता 20 गांवों को जोड़ता है। सुधीर सैनी, श्यामलाल, वेदप्रकाश, विपिन कुमार, अंकुल, ब्रिजेश ने बताया कि गांव में श्मशान घाट का रास्ता नहीं है। अंत्येष्टि के लिए खेतों से होकर जाना पड़ता है। कुशलपाल सैनी, दिलशाद, जीशान अहमद और वहीद ने बताया कि स्ट्रीट लाइटें मुद्दत से बंद पड़ी हैं। पानी निकासी नहीं है, जिस कारण बारिश के बाद तो कीचड़ हो जाता है।
चौंदाहेड़ी में नहीं है प्राथमिक स्कूल भी
चौंदाहेडी ग्राम पंचायत में इसके मजरे हज्जीपुर को मिलाकर 3000 की आबादी है। दोनों गांवों में कोई प्राइमरी स्कूल नहीं है। सुशील चौधरी, सुरेंद्र सैनी, गजे सिंह और धनबीर सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे गांव के स्कूल में जाना पड़ता है। जबकि स्कूल के लिए गांव में जमीन आरक्षित है। इस पर गांव का गंदा पानी इकट्ठा होता है। गांव की अनुसूचित बस्ती में जल निकासी की भी समस्या है। पानी खेतों में इकट्ठा होता है जिसे लेकर कई बार ग्रामीणों में टकराव भी हो चुका है।
गांव बेहड़ा खुर्द में सीसी सड़क पर भरा नालियों का पानी- फोटो : SAHARANPUR