सहारनपुर। विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन नकुड़ विधानसभा में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी ने अपनी ही पार्टी के एक नेता पर गंभीर आरोप लगाया है। दावा किया कि वह नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में जहां भी जाते हैं, वहां शाम होते ही पुलिसकर्मी पहुंच जाते हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में दबाव का माहौल बनाया जा सके। आशंका जताई कि उनके साथ कोई अनहोनी भी हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो उनका बेटा राजनीतिक उत्तराधिकारी होगा। पूर्व मंत्री ने पिछले दिनों चिलकाना में हुए कार्यक्रम में भी इसका जिक्र किया था।
पूर्व मंत्री ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह भाजपा के अनुशासित कार्यकर्ता हैं। टिकट किसे दिया जाएगा यह आलाकमान तय करेगा। जिसे भी नकुड़ से टिकट मिलेगा, उसे जिताने के लिए काम करेंगे। हालांकि, पिछले कुछ समय से जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, उससे वह चिंतित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नकुड़ में एक नेता के इशारे पर उनके कार्यक्रमों और गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। दावा किया कि वह जिस व्यक्ति के यहां जाते हैं, वहां शाम तक पुलिसकर्मी पहुंच जाते हैं। इससे लोगों में भी दबाव का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने बताया कि 24 जुलाई को कुछ कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे थे। कार्यकर्ताओं ने बताया कि एक स्थान पर टिकट को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान संबंधित नेता ने कथित तौर पर किसी के सामने कहा कि इतने डंपर चलते हैं और हादसे में बाहर से बाहर जमानत हो जाती है। सैनी ने कहा कि उन्हें सीधे तौर पर कोई धमकी नहीं मिली है और न ही इससे डरते हैं, लेकिन इस तरह की चर्चाओं को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को जानकारी दे दी है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने मोबाइल में एक नोट भी लिखकर रखा है। इसमें उन्होंने उल्लेख किया है कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है तो उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी उनका बेटा होगा।
सैनी समाज की टटोली जा रही नब्ज
उधर, पूर्व मंत्री डॉ. धर्म सिंह सैनी अपनी सक्रियता सैनी समाज के बीच भी बढ़ा रहे हैं। हाल ही में चिलकाना में उन्होंने सैनी समाज के साथ सामाजिक चेतना एवं राजनीतिक संगोष्ठी की थी। अब 23 अगस्त को गंगोह और 30 अगस्त को सहारनपुर के फुलवारी गार्डन में संगोष्ठी प्रस्तावित है। इन कार्यक्रमों में सैनी समाज के लोगों को ही आमंत्रित किया गया है। राजनीतिक जानकार इन कार्यक्रमों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाज के बीच अपनी पकड़ और समर्थन का आकलन करने की कवायद के तौर पर देख रहे हैं।