सहारनपुर। 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी में किसानों को साधने की सियासी कवायद तेज हो गई है। सहारनपुर से कांग्रेस की किसान बचाओ यात्रा शुरू हो गई है। वहीं, समाजवादी पार्टी और भाजपा भी अपने-अपने कार्यक्रमों के जरिए किसानों तक पहुंच बनाने में जुटी है।
गन्ना बेल्ट माने जाने वाले इस इलाके में किसान मुद्दे एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गए हैं।
पश्चिमी यूपी खासतौर पर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जैसे जिलों में किसान हमेशा से चुनावी समीकरण तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दल किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए सक्रिय हो गए हैं।
कांग्रेस ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सहारनपुर से किसान बचाओ यात्रा की शुरुआत की है। यह यात्रा पश्चिमी यूपी के कई जिलों से गुजरते हुए दिल्ली तक जाएगी। पार्टी का मकसद किसानों की समस्याओं जैसे गन्ना भुगतान, एमएसपी, बिजली दरें और कृषि लागत को लेकर सरकार को घेरना और किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है।
वहीं, समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं है। सपा लगातार किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित कर किसानों के बीच पहुंच बना रही है। पार्टी नेताओं का फोकस गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याएं सुनना और उन्हें अपने पक्ष में लामबंद करना है। सत्ता में बैठी भाजपा भी किसानों को साधने में लगी है। सरकारी योजनाओं और नीतियों जैसे पीएम किसान सम्मान निधि, सिंचाई योजनाएं और कृषि सुधार को गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
राजनीतिक दिग्गजों का मानना है कि पश्चिमी यूपी में किसान ही चुनावी परिणाम तय करने की कुंजी हैं। ऐसे में सभी दलों की रणनीति का केंद्र किसान बन चुके हैं। आने वाले महीनों में यह सियासी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।