सहारनपुर जिले को शांत करने में पुलिस अधिकारी बेशक फेल हो चुके हों, लेकिन शासन को दी जा रही रिपोर्ट में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है। इस खेल में पुलिस ने चार बवाल में अब तक नामजद हुए साढ़े चार सौ और अज्ञात दो हजार लोगों में से 178 लोगों की गिरफ्तारी दिखा दी।
जबकि हकीकत में गिरफ्तारी का आंकड़ा सौ भी पार नहीं हो पाया। एक ही व्यक्ति की अलग-अलग मुकदमों में गिरफ्तारी दिखाकर, गिरफ्तारियों की संख्या दोगुनी कर शासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
जिले में 20 मई को सड़क दूधली में बवाल हुआ। जिसमें उपद्रवियों ने पहले सड़क दूधली में और फिर एसएसपी आवास पर जमकर उत्पात मचाया। पुलिस ने इस मामले में 6 एफआईआर दर्ज किए और 60 से अधिक लोगों को नामजद तथा 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, लेकिन पुलिस ने सिर्फ 17 लोगों की गिरफ्तारी की।
शब्बीरपुर में 5 मई को हुए बवाल में 9 एफआईआर दर्ज की गई। उनमें भी मात्र 17 लोगों की गिरफ्तारी हो सकी। उसके बाद 9 मई को जगह-जगह हुए बवाल के मामले में 24 एफआईआर दर्ज हुई। इसमें पुलिस ने 37 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया था।
जिनमें से 7 वे लोग शामिल हैं जो सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालकर माहौल खराब कर रहे थे। उसके बाद 23 मई को मायावती की रैली से लौटते समय हुए हमले के मामले में भी 4 एफआईआर दर्ज की गई। जिनमें पुलिस ने 25 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया, जबकि 24 मई को दो और एफआईआर दर्ज की गई।
इन सभी मामलों में कुल 46 एफआईआर हुई। जिनमें साढ़े चार सौ लोग नामजद हुए और 2000 से अधिक लोगों को अज्ञात में शामिल कराया गया। लेकिन गिरफ्तारियों के रिकार्ड में पूरी तरह से पुलिस ने खेल कर दिया।
अभी तक पुलिस ने कुल 96 लोगों को ही गिरफ्तार किया, लेकिन एक-एक व्यक्ति की कई-कई मामलों में आरोपी होने के चलते एक व्यक्ति की कई गिरफ्तारियां दिखा दीं और गिरफ्तारियों का आंकड़ा लगभग दोगुना कर 178 तक पहुंचा दिया।
विशेष बात तो यह है कि जो गिरफ्तारियां की गईं उनमें कोई भी व्यक्ति ऐसा शामिल नहीं है, जो इन मामलों को भड़काने का आरोपी हो। किसी भी प्रमुख व्यक्ति की गिरफ्तारी सामने होते हुए भी नहीं की जा सकी।