सहारनपुर। लखनऊ में एटीएस द्वारा अलकायदा के दो आतंकी पकड़े जाने के बाद सहारनपुर पुलिस भी सक्रिय हो गई है। एसएसपी ने जनपद के सभी थाना प्रभारियों को संदिग्धों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही खुफिया विभाग भी जानकारी जुटाने में लग गया है। जनपद में पहले कई बार आतंकी पकड़े जा चुके हैं।
सहारनपुर समेत वेस्ट यूपी आतंकियों की शरणस्थली रहा है। जनपद भी आतंकियों ने पनाहगाह रहा। कई बार यहां से विभिन्न संगठनों से जुड़े आतंकियों को पुलिस और एटीएस ने पकड़ा है। लखनऊ में आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एसएसपी डॉ. एस चनप्पा ने जनपद के सभी 21 थाना प्रभारियों, छह सीओ, एसपी सिटी और एसपी देहात को अलर्ट रहने के साथ ही संदिग्ध लोगों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही खुफिया विभाग को भी सतर्क किया है। एसएसपी डॉ. एस चनप्पा ने बताया कि पुलिस पूरी तरह सक्रिय है। संदिग्धों की निगरानी की जा रही है।
जिले में सामने आई प्रमुख गतिविधियां
-दो वर्ष पूर्व देवबंद से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शाहनवाज तेली निवासी कुलगाम (जम्मू-कश्मीर) और आकिब अहमद मलिक निवासी पुलवामा की गिरफ्तारी हुई।
-सितंबर 2015 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने सहारनपुर रेलवे स्टेशन के बाहर से हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी एजाज शेख को दबोचा।
-2010 में पाकिस्तानी जासूस शाहिद उर्फ इकबाल भट्टी को पटियाला पुलिस ने हकीकतनगर से गिरफ्तार किया। वह देवराज सहगल के नाम से यहां रहा रहा था।
-2005 में अयोध्या में हुए बम विस्फोट में तीतरो निवासी डॉ. इरफान को पकड़ा गया।
-2001 में आतंकी गतिविधियों के चलते मुफ्ती इसरार को पकड़ा।
-1994 में तीन ब्रिटिश नागरिकों को बंधक बनाकर आतंकियों ने खाताखेड़ी रखा था। इन्हें छुड़ाने के लिए मुठभेड़ में इंस्पेक्टर ध्रुवलाल की मौत हो गई थी।
-1991 में लक्ष्मी सिनेमा में बम फटा था, जिसमें करीब दस लोग मारे गए थे, उस समय घटना में आतंकियों का हाथ बताया था।
-किफायत उल्लाह उर्फ जाफर अहमद उर्फ अताउरर्हमान उर्फ अल उल्लाह मोहल्ला कस्साबान सरसावा का रहने वाला था। वह जम्मू-कश्मीर चला गया था, फिर आतंकी संगठन हूजी का चीफ बना था। इनके अतिरिक्त भी कई बार बांग्लादेशी भी पकड़े जा चुके हैं।