सहारनपुर। पीएम आवास योजना 2.0 में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा गलत तरीके से शहरी योजना का लाभ ले लिए जाने की प्रारंभिक जांच की गई है। बताया जा रहा है कि विभाग की तरफ से फोन पर पूछताछ में करीब चार लोगों ने स्वीकार कर लिया है कि वह गांव के रहने वाले हैं।
योजना के दूसरे चरण में हजारों लोगों ने आवेदन किया हुआ है। अभी तक करीब 13 हजार लोगों का दो बार में पहली किस्त यानी 50 हजार रुपये की धनराशि खातों में आई है। ज्यादातर लोगों ने पहली किस्त के पैसे से नींव भरने की प्रक्रिया पूरी भी कर ली है, जबकि कुछ लगे हुए हैं। इसी चरण में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों द्वारा शहरी योजना का लाभ लिए जाने का मामला पकड़ में आया है, जो कि नियम विरुद्ध है।
अधिकारियों को शिकायत मिली है कि ग्राम पंचायत जेनपुर के गांव कुतुबपुर लबडौला, खारीबांस, छपरेड़ी, खत्रीवाला, छिदबना सहित अनेक गांवों में इसी तरह से लोगों ने शहरी योजना का लाभ ले लिया है। इसके बाद अधिकारियों द्वारा प्रारंभिक जांच की गई, जिसमें संबंधित लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर बात की गई तो कई लोगों ने स्वीकार कर लिया है कि वह गांव के रहने वाले हैं। अब अधिकारी उन दलालों का पता लगाने में जुटे हैं, जिन्होंने पूरा खेल रखते हुए महत्वपूर्ण योजना और सरकार की छवि को धूमिल करने का काम किया। मामले की जांच सीएलटीसी (सिटी लेवल टेक्निकल सेल) को दी गई है।
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लगातार की जा रही शिकायत
बजरंग दल मेरठ प्रांत के पूर्व संयोजक विकास त्यागी का दावा है कि जनपद में करीब दस हजार अपात्रों को योजना का लाभ दिया गया है। आरोप लगाया कि योजना में संगठित भ्रष्टाचार चल रहा है। इसमें एक एमआईएस कर्मचारी का बड़ा हाथ रहा है। उसने फर्जी आधार कार्डों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में अपात्रों को योजना का लाभ दिलाया। इस संबंध में पूर्व जिलाधिकारी को भी सबूत के साथ शिकायत की गई थी। उनका आरोप है कि कई कथित रूप से सामाजिक और राजनीतिक लोग व अधिकारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शहरी योजना का लाभ मिलने की शिकायत मिली है। जांच कराई जा रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ मामले गलत पाए गए हैं, जो भी लोग इसमें जिम्मेदार होंगे उनको बख्शा नहीं जाएगा।
- विकास पांडेय, पीओ डूडा/डिप्टी कलेक्टर