सहारनपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में रखे गए प्लास्टिक कूड़ा बैंक गायब हो गए हैं। गांव से निकलने वाले प्लास्टिक कूड़े को इन्हीं में डालने की योजना से सफल नहीं हो पाई। अब गांवों में खुले में प्लास्टिक कूड़ा डाला जा रहा है।
दरअसल, जनपद के 11 ब्लॉक स्तर पर रिसोर्स रिकवरी सेंटर बनाए गए हैं, जहां पर ठोस और तरल कूड़े को एकत्र कर उपयोगी बनाने के अलावा निस्तारण भी किया जाना है। इसी क्रम में जनपद की 884 ग्राम पंचायतों जालीदार छह फिट लंबे और दो मीटर चौड़े प्लास्टिक कूड़ा बैंक रखे गए थे, जिसमें लाखों रुपये खर्च हुए हैं। प्लास्टिक कूड़ा इन्हीं डालने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया। कुछ समय तो ग्राम पंचायतों में प्लास्टिक कूड़ा बैंक दिखाई दिए, लेकिन अधिकांश गांवों में कूड़ा बैंक गायब हो गए।
- जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर
गांव में जगह-जगह कूड़े ढेर लगने से ग्रामीण परेशान हैं। कहीं पर कूड़ा डालने के लिए न ही प्लास्टिक कूड़ा बैंक हैं और न अन्य डस्टबिन रखे हैं, जिसकी वजह से कूड़ा सड़कों पर फैला रहता है। -रमेश चंद, निवासी गांव ठोल्ला फतेहपुर
- प्लास्टिक और अन्य कूड़ा डालने की नहीं व्यवस्था
गांव में अब कहीं भी प्लास्टिक कूड़ा बैंक नहीं है। प्लास्टिक के अलावा सामान्य कूड़ा डालने की भी व्यवस्था नहीं है। इस वजह से गलियों, नालों और नालियों में कूड़ा अटा रहता है।
- संजय कुमार निवासी गांव बढ़ेडी कोली
- गंदगी से उठती रहती है दुर्गंध, नहीं होती सफाई
गांव में कहीं भी डस्टबिन नहीं है। न ही प्लास्टिक कूड़ा बैंक रखे गए हैं। गंदगी खाली प्लाटों और सड़कों पर फैली रहती है, जिनकी समय पर सफाई भी नहीं होती है। -अशोक कुमार निवासी बड़गांव
- ग्रामीणों और भूमि के लिए हानिकारक प्लास्टिक कूड़ा
प्लास्टिक कूड़ा जगह-जगह फैला रहता है। प्लास्टिक कूड़े की ग्रामीणों और भूमि के लिए भी हानिकारक है। डस्टबिन कहां रखे गए थे, इस बारे में संबंधित कर्मचारी भी नहीं बताते हैं।-श्याम सुंदर, निवासी गांव रसूलपुर
वर्जन :
ग्राम पंचायतों प्लास्टिक कूड़ा बैंक रखे हुए हैं। किसी ग्राम पंचायत से प्लास्टिक कूड़ा बैंक गायब हुए हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी -आलोक शर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी