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किसान दिवस -- किसानों की समस्याएं और योजनाएं

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योजनाएं तो खूब पर समस्याएं भी कम नहीं
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सहारनपुर। कृषकों की बेहतरी के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार ने योजनाएं तो खूब चलाई हुई हैं, लेकिन किसानों की समस्याएं भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या किसानों के सामने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर है तो, अब कृषि कानूनों को लेकर विरोध हो रहा है। इसमें किसानों की अहम मांग न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी है।
जिले में अभी तक भी बीते पेराई सत्र का 180 करोड़ रुपये और वर्तमान पेराई सत्र का करीब 190 करोड़ रुपये बकाया हो गया है। इस लिहाज से जिले के किसानों का 370 करोड़ रुपये चीनी मिलों पर बकाया हैं। इसके अलावा बिजली की बढ़ी दरों को लेकर भी विरोध होता रहा है।
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किसानों के हित में चल रही योजनाओं की बात करें तो, जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में पौने तीन लाख किसानों को लाभ मिल चुका है, जबकि करीब 25 हजार किसान इससे वंचित हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में जिले के करीब चार लाख कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत 450 किसानों को यंत्रों का वितरण किया जा चुका है, जबकि सोलर पंप योजना में 150 किसानों को लाभ मिला है।
योजनाओं का लाभ उठाकर बनें प्रगतिशील
जिले में ऐसे कई किसान हैं जो पारंपरिक तरीकों को छोड़कर कृषि विविधीकरण अपनाया और प्रगतिशील किसान बने। ऐसे किसानों में गांव नंदी फिरोजपुर निवासी सेठपाल, गांव बिडवी निवासी सुधीर सहित तमाम नाम शामिल हैं। वहीं, बीते पेराई सत्र में गन्ना पेड़ी में चिलकाना क्षेत्र के किसान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
दौर के साथ बदलते गए किसान
एक समय था जब किसान तकनीकी रूप से बेहद कमजोर थे, लेकिन बदलाव के साथ किसानों ने नई तकनीकों का प्रयोग किया। आज जिले के सैकड़ों किसान मशरूम की खेती कर रहे हैं, तो मत्स्य पालन में भी हाथ आजमा रहे हैं। वहीं, जिले की फल पट्टी भी मशहूर है तो, फूलों और नर्सरी को भी किसानों ने उद्योग के रूप में स्थापित किया है। जिले के आम का हर साल ही बड़ी मात्रा में निर्यात हो रहा है, जिसके लिए सहारनपुर की मंडी में मैंगो पैक हाउस भी स्थापित है।
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लक्ष्य से पांच गुना ज्यादा बेचा धान
वैसे तो जिले में सर्वाधिक रकबा एक लाख से अधिक है, लेकिन धान का रकबा करीब 60 हेक्टेयर है। इसमें करीब 12 हजार हेक्टेयर में सामान्य एवं मोटा धान की पैदावार हुई तो 48 हजार हेक्टेयर में बासमती धान होता है। इस बार 2000 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य था, जबकि 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा की खरीद हो चुकी है।
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