साढ़ौली कदीम। गांव कंबोहमजरा में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पिछले दो वर्ष से अधिक समय से मात्र एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। सुबह नौ से दुपहर एक तक अस्पताल खुलता है। इसके बाद यहां ताला लग जाता है। जब कभी फार्मासिस्ट विभागीय या अन्य कार्य से बाहर चला जाता है, तो भी पीएचसी पर ताला लटक जाता है। इस पीएचसी पर महिला व पुरुष चिकित्सक, दो फार्मासिस्ट व एएनएम के पद स्वीकृत हैं। स्टाफ के बैठने के लिए अलग अलग कक्ष व आवास बने हैं। अधिकतर कक्षों के बनने के बाद इनके ताले तक नहीं खुल पाये हैं। पीएचसी में चौकीदार तक की व्यवस्था विभाग की ओर से नहीं की गयी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पीएचसी की सुरक्षा भी राम भरोसे चल रही है। पीएचसी से क्षेत्र के अलीपुरा दामनकोह, मीरपुर ठसका, चकखीजरपुर, नुनयारी, टटोहल, शेखपुरा, धौलरा आदि सहित लगभग बीस गांव जुड़े हैं।
नहीं है जांच की कोई सुविधा
ग्रामीण ललित कुमार का कहना है कि चिकित्सक के अभाव में खुद ही अपनी बीमारी बता कर दवाई लेनी पड़ती है। जांच की भी कोई सुविधा नहीं है।
सात किमी दूर जाने को होते हैं मजबूर
जबर सिंह ने बताया कि पीएचसी पर ताला होने की दशा में उन्हें सात से आठ किमी दूर स्थित साढ़ौली कदीम सीएचसी पर जाने को मजबूर होना पड़ता है।
विभागीय अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई
मोहम्मद मुशरूफ का कहना है कि वे विभागीय अधिकारियों से कई बार चिकित्सक की तैनाती एवं आकस्मिक चिकित्सा मुहैय्या कराने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
सफाई से लेकर दवा वितरण तक उनकी जिम्मेदारी
पीएचसी पर तैनात फार्मासिस्ट सुशील कुमार का कहना है कि दो वर्ष पूर्व उनकी तैनाती पीएचसी में हुई थी। तभी से वह साफ सफाई से लेकर दवाई वितरण व अन्य विभागीय कार्य खुद ही देखते हैं। उनके अलावा पीएचसी पर मात्र एक वार्ड ब्वाय है जो दिव्यांग है।
चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को पूर्व में भी अवगत कराया जा चुका है। चिकित्सक मिलते ही तैनाती कर दी जाएगी।
डॉ. नितिन कदवाल
प्रभारी चिकित्साधिकारी साढ़ौली कदीम