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संघर्ष के बाद सोराना में शांति, पुलिस और पीएसी तैनात

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सरसावा (सहारनपुर)। बाबा बंशी वाले के ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनकी विरासत को लेकर बुधवार को हुए संघर्ष के बाद बृहस्पतिवार को ग्राम सोराना में शांति बनी रही। दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है। वहीं, पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों ने मंदिर परिसर तथा आसपास एहतियातन पुलिस और पीएसी तैनात की।
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बुधवार को हनुमान मंदिर में धरती में समाहित बाबा की अस्थियों को निकालकर हरिद्वार गंगा नदी में विसर्जित करने की बात को लेकर दो पक्षों में संघर्ष हो गया था, इसमें दोनों पक्षों के 11 लोग घायल हो गए थे। इसके बाद प्रशासन द्वारा गांव में पुलिस तथा पीएसी के जवान तैनात कर दिए हैं। संघर्ष को लेकर एक पक्ष रविंद्र ने डेढ़ दर्जन लोगों को नामजद तथा कुछ अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। जबकि दूसरे पक्ष से सत्येंद्र ने भी 20 से ज्यादा लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
वहीं, एक तहरीर ग्राम प्रधान के चाचा नरेश चौधरी ने पुलिस को दी, इसमें बताया कि उनका इस विवाद से कोई लेना देना नहीं था। वे अपने ऑफिस पर बैठे थे, तभी कुछ युवकों ने उन पर जानलेवा हमला किया।
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मंदिर में चल रहा गायत्री मंत्र जाप
सोराना गांव में स्थित हनुमान मंदिर में 11 पंडितों द्वारा गायत्री मंत्र आदि के सवा लाख जाप अनवरत जारी हैं। अनुयायी रविंद्र शर्मा ने बताया शाम के समय गरुड़ पुराण का पाठ भी किया जा रहा है। दोनों कार्य 20 जुलाई को शोकसभा के दिन संपन्न होंगे।
अनुयाइयों को रहना होगा विवादों से दूर
संघर्ष प्रकरण को लेकर गांव सोराना के लोगों ने भी दुख व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि बाबा जीवन भर फक्कड़ की तरह धोती दुपट्टे में सरलता के साथ रहे। कभी विलासिता नहीं अपनाई। पैरों में लकड़ी की खड़ाऊं और भीषण सर्दी में भी पतला सा कंबल ही धारण करते थे। बाबा के ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके अनुयायियों का व्यवहार खेदजनक है। गांव के लोगों ने कहा कि दोनों ही पक्ष बाबा के अनुयायी हैं। यदि कोई गलतफहमी थी तो बैठकर हल निकालना चाहिए था, आपसी खींचतान में बाबा की छवि को नुकसान पहुंचाया है। यदि अनुयायी बाबा के आदर्शों पर चलना चाहते हैं तो उन्हें भी बाबा की तरह विवादों से दूर रहकर निस्वार्थ भाव से भूखे को भोजन, प्यासे को पानी तथा निर्धन को तीर्थ यात्रा जैसे पुनीत कार्य जारी रखने चाहिए।
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