देवबंद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जड़ोदाजट में फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय का पद खाली है। चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के बाद स्टाफ नर्स ही पर्चा बनाकर मरीजों को देखने के बाद दवा देती है। अस्पताल में जांचों के नाम पर पैथोलॉजी तो बनी है, लेकिन जांच की सुविधा नहीं है। मरीजों को अपनी जांच करवाने के लिए सात किमी दूर देवबंद जाना पड़ता है।
जड़ोदाजट पीएचसी में प्रसव रूम, पैथोलॉजी लैब, ड्रेसिंग रूम, ओपीडी, महिला वार्ड व दवा काउंटर कक्ष बने हैं। इस पीएचसी से जड़ोदाजट के अलावा निहालखेड़ी, रसूलपुर टांक, शेखूपुर, सैनपुर व घलौली गांव से लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल की पड़ताल करने पर पता चला कि यहां पर एक चिकित्सक डॉ. विरेंद्र कटारिया, स्टाफ नर्स में नीशू भारद्वाज व अमित कुमार तथा सफाईकर्मी के पद पर सोनकर बिरला नियुक्त हैं।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 25 से 30 लोग उपचार के लिए आते हैं। यहां पर उपचार के लिए आए मरीजों ने बताया कि अस्पताल में जरूरी दवाएं मिल जाती हैं, लेकिन कुत्ते काटने के इंजेक्शन लगवाने के लिए देवबंद जाना पड़ता है। अस्पताल परिसर में ही राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय भी है, लेकिन इसमें नियुक्त चिकित्सक डॉ. नितिन शर्मा सप्ताह में सिर्फ मंगलवार व बृहस्पतिवार को ही आते हैं। बाकी दिनों में मरीजों को निराश होकर घर लौटना पड़ता है। लैब में जांच की भी सुविधा नहीं है।
जड़ोदाजट निवासी तेज सिंह ने बताया कि अस्पताल में खांसी, बुखार, जुकाम आदि रोगों की दवाएं मिल जाती हैं, लेकिन प्रसव की सुविधा नहीं है। गर्भवती महिला को देवबंद सीएचसी ही लेकर जाना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत रात में आती है। सरकार को रात में भी पीएचसी पर एक कर्मचारी की ड्यूटी लगानी चाहिए।
जड़ोदाजट निवासी भोपाल सैनी ने बताया कि अस्पताल में जरूरी जांचे शुगर, बीपी और एचबी की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए, जिससे मरीजों को लाभ मिल सके।
पीएचसी प्रभारी डॉ. विरेंद्र कटारिया ने बताया कि सर्दी के मौसम के चलते अस्पताल में रोजाना करीब 20 से 25 ओपीडी होती हैं। अस्पताल में सफाई व्यवस्था पर पूरा ध्यान रखा जाता है। खाली पदों के संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है।