फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माता-पिता को जकात देना जायज नहीं

Tue, 14 Jun 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
विज्ञापन
ramjan - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
सहारनपुर में  इमाम कारी इसहाक़ गोरा द्वारा बनाई गई हेल्पलाइन पर पूछे हुए कुछ ख़ास सवाल-जवाब। इसके जवाब कारी इसहाक गोरा द्वारा दिए गए।
विज्ञापन


सवाल : किरतपुर बिजनौर से याकूब ने पूछा कि मेरे गुर्दों में पथरियां हैं। इस समय मुझको बहुत दर्द हो रहा है, दवा खाकर रोजा तोड़ना नहीं चाहता, क्या ऐसी हालत में मैं इंजेक्शन लगवा सकता हूं? इससे रोजा तो नहीं जाएगा?

जवाब : बीमारी की हालत में यदि कोई रोजेदार इंजेक्शन लगवाता है, चाहे नस में हो या मांस में रोजा नहीं टूटेगा, क्योंकि इंजेक्शन से दी जाने वाली  दवा को खाना-पीना नहीं कहते। आप रोजे में इंजेक्शन लगवा सकते हैं।   
विज्ञापन


सवाल : लुकमान ने कंबोह के पुल से जानना चाहा कि हमारे घर में काफ़ी समय से अदरक और  नमक से रोजा इफ़्तार करते हैं, मेरे पिता कहते हैं ये सुन्नत है। क्या ये सही है?  

जवाब : नमक अदरक से रोजा इफ़्तार को सुन्नत या मुस्तहब समझना गलत है।

सवाल : मोहल्ला नूरबस्ती से सैयद आयत ने मालूम करना  चाहा कि अक्सर लोग हदीसों के हवाले से कहते हैं कि हर साहिबे निसाब मुसलमान पर  जकात फ़र्ज है, क्या क़ुरान में जकात का जिक्र नहीं है?
विज्ञापन


जवाब : हदीसों के अलवाह क़ुरान में भी जकात का जिक्र है, जकात को इस्लाम में बड़ी अहमियत दी गई है। जकात इस्लाम का तीसरा अहम भाग है, नमाज रोजे की तरह ये भी एक फ़र्ज इबादत है, क़ुरान ए करीम में नमाज के साथ तक़रीबन 82 स्थानों पर जकात का जिक्र किया गया है। 

सवाल : गुल मोहम्मद ने मुज़फ्फ़रनगर से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पिता को जकात दे ये जायज है या नहीं ? 
जवाब : अपने माता या पिता को जकात या सदक़ा फ़ितर देना जायज नहीं है।

सवाल : डॉक्टर जीशन ने रसूलपुर से जानना चाहा है कि जकात वाजिब होने की क्या शर्तें हैं?
जवाब : जकात फ़र्ज होने की ख़ास चार शर्तें है, (1) इस्लाम में होना, (2) निसाब का पूरा होना, (3) उस पर साल गुजर जाए, (4) आकिल बालिग़ होना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें