सहारनपुर। मानसून आने में हो रही देरी से जनपद में जहां धान की रोपाई पिछड़ रही है, वहीं गन्ना सहित अन्य फसलों पर भी इसका विपरीत असर पड़ रहा है। जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। अब तक मात्र 40 फीसदी ही धान की रोपाई हो सकी है। यदि मानसून की बारिश शुरू हो जाती तो यह आंकड़ा 70 फीसदी तक पहुंच जाता।
आमतौर पर जनपद में इस समय तक मानसून की दस्तक हो जाती है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। किसान अभी भी मानसून की राह देख रहे हैं। मानसून की बारिश नहीं होने से जहां धान की रोपाई प्रभावित हो रही है, वहीं गन्ना सहित अन्य फसलों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। मानसूनी बरसात के इंतजार में धान की रोपाई पिछड़ रही है। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी है उनके सामने उसे बचाने की चुनौती है। बारिश नहीं होने से किसानों को ट्यूबवेल, रजबहे या डीजल पंप से फसलों को पानी देना पड़ रहा है। इससे फसल की लागत में बढ़ोत्तरी होना तय है। धान के साथ ही गन्ना सहित अन्य फसलों की बढ़वार भी मानसून की बारिश नहीं होने से प्रभावित हो रही हैं।
धान की रोपाई में हो रही देरी
नागल क्षेत्र के गांव मीरपुर मोहनपुर निवासी किसान प्रमोद वालिया ने बताया कि बारिश नहीं होने और बिजली कम आने से धान की रोपाई पिछड़ रही है। यदि बारिश शुरू हो जाती तो अब तक अधिकांश धान की रोपाई कर दी जाती। गांव साधारणसिर निवासी किसान नीरज राणा का कहना है कि बारिश का इंतजार हो रहा है। ट्यूबवेल से गन्ना आदि फसलों में सिंचाई करें या धान लगाए।
आमतौर पर जिले में जून के अंतिम सप्ताह तक मानसून की बारिश शुरू हो जाती है। इस बार मानसूनी बरसात अभी तक नहीं होने से धान की रोपाई पिछड़ रही है। जिले में अभी तक करीब 40 फीसदी ही धान की रोपाई हो सकी है। यदि बारिश शुरू हो जाती तो अब तक 70 प्रतिशत से अधिक रकबे में धान लग जाते। - धीरज कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी