- विश्व के कई देशों में होता है काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। ग्रेटर नोएडा में हुए हस्तशिल्प मेले के बाद से कई निर्यातकों को काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के नए ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। इससे यूक्रेन-रूस युद्ध से पैदा हुई मंदी के शिकार हुए निर्यातकों में उत्साह है। कई निर्यातकों के ऑर्डर अभी प्रक्रिया में हैं।
दुनिया भर में जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों की काफी मांग है। यहां से बड़े पैमाने पर विश्व के कई देशों को काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात होता है। जनपद में काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का वार्षिक कारोबार करीब 1400 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें से 1100 से 1200 करोड़ रुपये का निर्यात दुनिया के कई देशों में होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध का काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात पर भी विपरीत असर पड़ा। इससे अमेरिका एवं यूरोपीय के कई आयातकों ने अपने ऑर्डर होल्ड कर दिए थे। ग्रेटर नोएडा में हुए हस्तशिल्प मेले के बाद से जनपद के कई निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलना शुरू हो गए हैं।
इन देशों में है अधिक मांग
जनपद से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात दुनिया के कई देशों में होता है। 40 से 45 प्रतिशत अमेरिका, 20 से 25 फीसदी यूरोपीय देशों और 10 से 15 प्रतिशत मध्यपूर्व के देशों में निर्यात होता है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, स्वीडन, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, नीदरलैंड, दक्षिणी अफ्रीका, दुबई, संयुक्त अरब अमीरात, सउदी अरब, रूस और यूक्रेन आदि में भी जनपद के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों को खासा पसंद किया जाता है।
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बोले निर्यातक
अभी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया से काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के नए ऑर्डर मिले हैं। जर्मनी से मिलने वाला ऑर्डर भी प्रक्रिया में हैं। इससे यूक्रेन-रूस युद्ध से पैदा हुई निराशा दूर होगी। निर्यातक मयंक अग्रवाल, स्वामी एआरएम इंटरनेशनल।
अमेरिका और यूरोप में महंगाई के चलते पिछले कुछ समय से निर्यात ऑर्डर होल्ड पर चल रहे थे। अभी फ्रांस, स्पेन और जर्मनी से मिले ऑर्डर तैयार किए जा रहे हैं। इससे मंदी के शिकार इस उद्योग को राहत मिलेगी। निर्यातक हाजी इरफान, स्वामी नेशनल हैंडीक्राफ्टस।