सहारनपुर में पांवधोई नदी पर पुल खुमरान की बगल में हुए अतिक्रमण और वर्षों से बनी दुकानों को तोड़ने के लिए कई विभागों की टीम सिटी मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में पहुंची। कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने जमकर हंगामा किया।
एक व्यापारी के बुजुर्ग पिता ने सिटी मजिस्ट्रेट, प्रभारी नगरायुक्त और सीओ प्रथम के सामने ही अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों ने बमुश्किल उन्हें रोका। तमाम विरोध और हंगामे के बीच प्रशासन की टीम दुकानों को ध्वस्त करने में सफल रही।
पुल खुमरान पुराना और जर्जर होने की वजह से प्रशासन ने पुराने पुल को ध्वस्त कर नया फोरलेन पुल बनाने का निर्णय लिया है। मार्च माह में नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स ने पुल का दौरा कर पुल की बगल में बनी नगर निगम की छह दुकानों को हटाने की जरूरत बताई थी।
इस लिए दुकानदारों को 24 अप्रैल को नोटिस जारी कर सात मई तक दुकानें खाली करने को कहा था। दुकानदारों को सात मई को दुकानों को ध्वस्त करने की सूचना भी दे दी गई थी।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत सोमवार को नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की टीम सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार के नेतृत्व में पुल की जद में आ रही दुकानों और अतिक्रमण को ध्वस्त करने पहुंची।
टीम ने जाते ही पुल की बगल में बनी दो दुकानों को ध्वस्त कर दिया, मगर बाकी चार दुकानदारों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान अधिकारियों और व्यापारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। चूंकि चारों दुकानदारों ने दुकानें खाली नहीं की थीं।
ऐसे में प्रशासन ने उन्हें दुकानें खाली करने को कहा। अन्यथा की स्थिति में सामान सहित दुकानों को ध्वस्त करने की चेतावनी दी। इसके बाद दुकानदारों ने दुकानें खाली करनी शुरू कर दी। दोपहर 12 बजे से साढ़े तीन बजे तक दुकानें खाली की गईं।
दुकानें खाली करते हुए व्यापारी अशोक के सिर में कांच लगने से वह चोटिल हो गए, जबकि सचिन खुराना के हाथ में चोट आई। तमाम हंगामे और विरोध के बावजूद प्रशासन ने सभी दुकानें ध्वस्त कराईं। दुकानों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे से शाम करीब पांच बजे तक चली। सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सीओ प्रथम इंदु सिद्धार्थ, प्रभारी नगरायुक्त/चीफ इंजीनियर जितेंद्र केन समेत तमाम अधिकारी और भारी पुलिस व आरआरएफ बल मौके पर मौजूद रहा।
70 वर्षीय व्यापारी ने किया आत्मदाह का प्रयास
जिस समय सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार, सीओ प्रथम इंदु सिद्धार्थ और प्रभारी नगरायुक्त जितेंद्र केन दुकानों को ध्वस्त कराने की तैयारी में थे। इसी दौरान एक दुकान में चल रही जुनेजा ट्रेडिंग कंपनी के मालिक करीब 70 वर्षीय सुरेंद्र जुनेजा अधिकारियों के समक्ष पहुंचे और खुद के ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। पुलिस बल और साथी व्यापारियों ने उन्हें बमुश्किल रोका। इसके बाद पुलिस उन्हें वहां से ले गई।
फूट फूटकर रोए व्यापारी और परिजन
करीब 50 साल से दुकानें बचला रहे व्यापारी दुकानों को ध्वस्त होता देख फूट फूटकर रोए । साईं ट्रेडिंग कंपनी के नाम से जरनल स्टोर चलाने वाले व्यापारी और उनका पुत्र रोते नजर आए। व्यापारी पुत्र मौके पर पहुंची अपनी मां से लिपटकर जोर जोर से रोने लगा, जिसे व्यापारियों ने समझाकर शांत किया। उनका कहना था कि रोजगार छीना जाना मौत से बड़ा झटका है। उनका सवाल था कि अब वह अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे।
नेताओं से लगाते रहे मदद की गुहार
नगर निगम ने दुकानदारों को 24 अप्रैल को नोटिस जारी किए थे। तभी पता चल गया था कि नगर निगम इन दुकानों को ध्वस्त करेगा। दुकानदारों ने सांसद राघव लखनपाल शर्मा, मेयर संजीव वालिया और पूर्व विधायक राजीव गुंबर आदि से अपनी दुकानें बचाने की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि मेयर ने कार्रवाई से एक घंटे पहले भी उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी दुकानें टूटने नहीं दी जाएंगी। मगर जब वह मेयर से मिलकर अपनी दुकानों पर लौटे तो प्रशासन की टीम दल और बल के साथ दो जेसीबी लेकर दुकानों को ध्वस्त करने पहुंच चुकी थी।
नगरायुक्त और महापौर एक राय नहीं
दुकानों को ध्वस्त करने को लेकर नगरायुक्त गौरव वर्मा और मेयर संजीव वालिया एक राय नहीं हैं। सोमवार को मौके पर मिले नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मेयर केवल दो दुकानों को तोड़े जाने के पक्ष में थे, जो पुल की बगल में बनी थीं, जबकि नगरायुक्त सभी दुकानों को तोड़ने की बात कह रहे थे। नगरायुक्त का तर्क था कि दुकानें नदी किनारे बनी हैं जो सड़क के बीच में हैं। दुकानें हटने के बाद धोबीघाट से आने वाली सड़क पूरी तरह साफ होगी, जिसके बाद जाम की स्थिति नहीं बनेगी।
1964 से बनी हुई हैं दुकानें 90 साल के लिए
व्यापारियों ने बताया कि यह दुकानें 1964 की बनी हुई हैं। पहले उनके पिता इन दुकानों को चलाते थे और अब कई साल से वह संभाल रहे हैं। बताया कि तत्कालीन नगर पालिका ने उन्हें यह दुकानें 90 साल के लिए दी थीं, मगर नगर निगम इन दुकानों को इतनी जल्दी ध्वस्त करा रहा है जो ठीक नहीं है।
हमें तो बर्बाद ही कर दिया
दुकानें ध्वस्त किए जाने से आहत और नाराज व्यापारियों का गुस्सा बार-बार फूटता रहा। विवेक जुनेजा, लेखराज , पवन कुमारी, सूरजप्रकाश तलवार, विरेंद्र कुमार तलवार आदि का कहना था कि वह शुरू से भाजपा को नोट और वोट देते आ रहे हैं, मगर आज उन पर मुसीबत आई है तो एक भी भाजपा नेता उनको बचाने नहीं पहुंचा है। आरोप लगाया कि वह सुबह से भाजपा नेताओं को फोन लगा रहे हैं, मगर एक भी नेता ने मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा है। उनकी बर्बाद करने में भाजपा सरकार और स्थानीय नेताओं का बड़ा रोल है। व्यापारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी नारेबाजी की।