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Saharanpur News: मौत के बाद एक व्यक्ति बचा सकता है आठ लोगों की जान

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विश्व अंगदान दिवस
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- किसी ने किडनी तो किसी ने किया नेत्रदान, लेकिन अभी भी जागरुकता की कमी
- अब तक 900 से अधिक लोग कर चुके नेत्रदान, किडनी देने के मामले भी आए
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। आज विश्व अंगदान दिवस है। समाज में ऐसे कई लोग हैं जो अपनों के साथ ही दूसरों को नया जीवन देने के लिए अंगदान कर रहे हैं। किसी ने किडनी तो किसी ने नेत्रदान किया है, लेकिन अभी भी जागरुकता की कमी है। ऐसे में अंगदान के प्रति जागरूक होना होगा, क्योंकि अपने लिए जिए तो क्या जिए।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजीव मिगलानी बताते हैं कि विश्व अंगदान का उद्देश्य अंग और ऊतक दान के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। एक व्यक्ति अपनी एक किडनी, फेफड़े, लिवर, आंत और ऊतक का एक हिस्सा दान कर सकता है। एक व्यक्ति आठ लोगों की जान बचा सकता है। दिल, फेफड़े, लिवर, गुर्दे, छोटी आंत, आंखों का कॉर्निया त्वचा आदि शरीर के अंगों को दान कर सकता है।
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जिले में अब तक 900 से अधिक लोग नेत्रदान कर दूसरों की जिंदगी रोशन कर चुके हैं, लेकिन शरीर के अन्य अंगदान करने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने बहन और पत्नी को किडनी देकर नई जिंदगी दी है। शिव विहार निवासी अमित वर्मा की वर्ष 2019 में उनकी दोनों किडनी खराब हो गईं थीं। चिकित्सकों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी थी। इसके बाद वर्ष 2021 में उनकी बहन शालिनी वर्मा ने एक किडनी दी थी।
अंगदान में चुनौतियां
- जागरुकता की कमी
- गलत धारणाएं
- अंग प्रत्यारोपण केंद्रों की कमी
- प्रशिक्षित स्टाफ और समन्वय की कमी
- कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं
- कम मृतदाता दर
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