सहारनपुर। एक जिला एक उत्पाद के बाद शासन ने एक जिला एक व्यंजन योजना लागू की है। इसमें जिले से शहद आधारित उद्योगों को शामिल किया है। इससे शहद आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। जिले का प्रदेश में शहद उत्पादन में पहला स्थान है। वैसे ही शहद उद्योग में मिठास बढ़ने की उम्मीद है।
शहद उत्पादों का बड़ी संख्या में विदेशों को भी निर्यात किया जाता है। एक जिला एक उत्पाद योजना में वुडकार्विंग और होजरी उद्योग शामिल हैं। सरकार ने जिले के स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में कदम उठाया है। इसी कड़ी में शहद को इस योजना में शामिल किया गया है। जिले में इस उद्योग से करीब छह हजार कारोबारी जुड़े हैं। सरसों, लीची और नीम के फूलों आदि से शुद्ध शहद उत्पादित किया जाता है।
इसका निर्यात अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि यूरोपीय देशों में होता है। योजना में शामिल होने के बाद शहद उद्योग से जुड़े कारोबारियों को काफी सहूलियत होगी। उद्योग लगाने के लिए विभागीय योजनाओं का लाभ मिलेगा और रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। जिले में हर साल करीब आठ से दस हजार क्विंटल शहद का उत्पादन होता है। इसमें भी गंगोह ब्लॉक काफी आगे है।
- जल्द जारी होगी गाइडलाइन
उपायुक्त उद्योग अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जल्द ही इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन शासन की ओर से जारी होगी। योजना से उद्यमी को राहत मिलेगी। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में अपना स्टॉल लगा सकेंगे। इसमें भी सरकार सब्सिडी दे सकती है। साथ ही अन्य योजनाओं की तरह मार्जिन मनी जैसी स्कीम लागू की जाएगी। जिले के शहद उद्योग में काफी संभावनाएं हैं।
- बोले कारोबारी
- कारोबारी अजय सैनी ने बताया कि एक जिला एक व्यंजन योजना से जिले के शहद उद्योग को काफी सहायता मिलेगी। शहद से बने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगने वाले मेलों में भी प्रदर्शित किया जा सकेगा। इससे जिले को एक नई पहचान मिलेगी। साथ ही उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
- कारोबारी प्रियव्रत्त शर्मा ने बताया कि योजना का निश्चय ही फायदा उद्योग और उद्यमी को होगा। सरकार को इसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की तरह योजनाओं को शामिल करना चाहिए। जिले शहद उत्पादन के मामले में प्रदेश में नंबर वन है। सही प्रोत्साहन मिले तो इसमें अपार संभावनाएं हैं।