नोट बंदी के 27 दिन बाद भी नगर के अधिकांश एटीएम पर ताले लटके हैं। सिर्फ एक आध मशीन ही नोट उगल रही है। वहीं, बैंकों में कैश पहुंचते ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। बैंकों में अब पुरानी करेंसी जमा करने वाले कम जबकि निकालने वाला ज्यादा लोग पहुंच रहे हैं।
नगर में पीएनबी, स्टेट बैंक, कारपोरेशन, एक्सिस, यूको, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन, एचडीएफसी, शिवालिक समेत अन्य बैंकों के दो दर्जन एटीएम लगे हैं, लेकिन अधिकांश एटीएम मशीनों पर आठ नवंबर से जड़े ताले 27 दिन बाद भी नहीं खुल सके। कुछ बैंकों के एटीएम ही नोट उगल रहे हैं, लेकिन इन पर सुबह से शाम तक लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
सोमवार को नगर के अधिकांश बैंकों में कैश लेने के लिए लोगों की शाम तक भारी भीड़ देखने को मिली। सर्व यूपी ग्रामीण बैंक समेत कई अन्य बैंकों पर नो कैश के बोर्ड टंगे रहे। इस कारण इन बैंकों पर लोगों की भीड़ दिखाई नहीं पड़ी। पूछने पर बैंकों के प्रबंधकों ने बताया कैश नहीं पहुंचा है। नगदी निकालने लाइनों में खड़े लोगों ने बताया तीन दिन पहले टोकन मिला था, लेकिन कैश अभी तक नहीं मिला।
सबसे अधिक दिक्कत शादी वाले परिवारों को उठानी पड़ रही है। घर का जरूरी कामकाज छोड़कर परिवार के लोग कैश लेने को लाईनों में खड़े हैं। कुछ जगह पर तो लाइनों में खड़े लोगों के बीच नोक-झोंक भी देखने को मिली। वहीं, कई कर्मचारियों ने बताया उनकी सैलरी बैंकों में उनके खातों में आ चुकी है, परंतु बैंक वाले सिर्फ चार हजार रुपये थमा रहे हैं। जबकि महीने भर का खर्च इतने कम रुपये में कैसे चुकाएं, इसकी चिंता उन्हें खा रही है।
रुपयों के लिए 12 दिन से काट रहा बैंक के चक्कर
नानौता। ग्राम खुड़ाना निवासी किसान नाथी पुत्र जसरथ ने एसबीआई शाखा के प्रबंधक को पत्र भेज कर अवगत कराया कि उसके पुत्र की सात दिसंबर की शादी है, जिसके लिए वह पिछले 12 दिन से बैंक में रुपये लेने के लिए चक्कर काट रहा है।
किसान का कहना है कि उसने बैंक की शर्तों के अनुरूप शादी में होने वाले खर्चे की रसीदें भी लगा दी है, इसके बावजूद बैंक मैनेजर ने उसे अब तक 24 हजार रुपये ही दिए हैं। जबकि शादी के खर्च का करीब एक लाख रुपये से अधिक का भुगतान होना है।
पीड़ित किसान का कहना है कि रुपया नहीं मिलने से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा है और यदि रुपयों की किल्लत से शादी में अवरोध आता है तो उसकी जिम्मेदारी शाखा प्रबंधक की होगी। उधर शाखा प्रबंधक कहना है कि उपलब्धता के आधार पर भुगतान किया जा रहा है।