सहारनपुर में आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन एवं उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेज संघ के आह्वान पर शुक्रवार को जिले की सभी स्टाफ नर्सों ने सामूहिक अवकाश रखा। कार्य बहिष्कार करते हुए नर्सों ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी के सामने विरोध प्रदर्शन भी किया। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के खिलाफ चलाए जा रहे आंदोलन के तहत ये नर्सें शनिवार को जंतर मंतर नई दिल्ली में होने वाले विशाल प्रदर्शन में शामिल होंगी।
नर्सों की इस हड़ताल के कारण जिला अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर अन्य चिकित्सीय कक्षों, वार्डों के अलावा महिला अस्पताल और टीबी चिकित्सालय में मरीजों को देखभाल संबंधी सेवाओं में खासी परेशानी उठानी पड़ी। नर्सों की कमी में फार्मेसिस्टों की छुट्टियां बंद कर उनकी सेवाएं मरीजों के लिए लेनी पड़ीं। इमरजेंसी के बाहर प्रदर्शन के दौरान नर्सेज संघ की मंडल अध्यक्ष सुनयना आलम ने कहा कि नर्सों का न्यूनतम एंट्री पे 5400 का लागू होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग की अन्य समानताओं को दूर किया जाए। यूनिफार्म एवं धुलाई भत्ते को पूर्व की तरह अलग रखते हुए बढ़ाने, जोखिम भत्ता दिलाने, योग्यता भत्ते में बढ़ोतरी, महीने में आठ दिन ऑफ, मातृत्व अवकाश के दौरान पूरा वेतन, ग्रुप बीच में शामिल करने और टेलीफोन अलाउंस देने की मांगें भी पूरी की जाए।
नर्सों से कहा गया कि यदि 15 मार्च तक उनकी समस्याओं का निराकरण न हुआ तो इसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएंगी। विरोध प्रदर्शन में आशा रोबर्ट, मधु ठाकुर, रेनू अरोड़ा, अमरजीत कौर, नीलम गलोरी, अनिरुद्ध नायर, मंजू श्रीवास्तव, सर्वेश चतुर्वेदी, प्रवीण चतुर्वेदी, जीनत खान, मंजुला जैन, ऊषा चांद, रूबी फिलिप्स, मंजू रानी, सीता, नीलम कपूर, संतोष सलमानी, सुशीला गोसाई, रुचि चौधरी, शकुंतला बेंसन, अनिता मलिक आदि शामिल रही।
महिला अस्पताल में संविदा नर्सों से चलाया काम
जिला महिला चिकित्सालय की कार्यवाहक सीएमएस डा. ममता सोढ़ी ने बताया कि नर्सों के काम न करने पर दिक्कतें तो आई हैं, लेकिन इसे मैनेज करते हुए संविदा नर्सों से काम कराया गया है। उनका कहना है कि महिला अस्पताल में अब संविदा नर्सें रेग्युलर से अधिक हैं।
रात में भी मरीजों की सेवा में रहेंगे फार्मेसिस्ट
नर्सों की ओर से नाइट ड्यूटी न करने की भी चेतावनी दी गई है। इसके चलते अस्पताल प्रबंधन ने भी प्लानिंग तैयार कर ली है। जिला चिकित्सालय की प्रमुख अधीक्षक डा. आशा शर्मा का कहना है कि नर्सों के काम न करने पर दिन में फार्मेसिस्टों से काम लिया गया। रात में भी जरूरतमंद मरीजों को वे अपनी सेवाएं देंगे।