ट्रेन में बॉडी वॉर्न कैमरे के साथ जीआरपी सिपाही
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अपराधियों को पकड़ने के लिए जीआरपी अब नई तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। ट्रेनों में चलने वाले जीआरपी के सभी सिपाहियों को बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस किया गया। मुख्यालय से जीआरपी को 22 नए बॉडी वॉर्न कैमरे मिले हैं। इनमें हर गतिविधि कैद होगी। साथ ही अपराधियों का डाटा भी सुरक्षित रहेगा।
सहारनपुर जीआरपी थाने में एक थानाध्यक्ष, छह सब इंस्पेक्टर, 21 हेड कांस्टेबल और 48 कांस्टेबल तैनात हैं। सहारनपुर से गुजरने जाने वाली 11 ट्रेनों में जीआरपी का एस्कॉर्ट चलता है। अपराधियों की धरपकड़ के लिए अब जीआरपी पुराने तौर तरीकों के बजाए नई तकनीक को अपनाया है। चलती ट्रेन में अपराध करने वालों की धरपकड़ करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में सिपाहियों को बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस किया गया है। ड्यूटी के दौरान सिपाहियों को यह कैमरे वर्दी के ऊपर लगाना होगा। जीआरपी अफसर इन कैमरों की मदद से सिपाहियों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। यह फुटेज उन मामलों को सुलझाने में भी मददगार साबित होगी, जिनकी शिकायत ही महीनों में मिलती है। इन ऑटोमेटिक कैमरे से तैयार फुटेज की मदद से अपराधियों का एक डाटा भी तैयार होगा।
ये ट्रेनें रहती हैं जीआरपी एस्कॉर्ट से लैस
जीआरपी का एस्कॉर्ट बेगमपुरा एक्सप्रेस, लखनऊ-चंडीगढ़ एक्सप्रेस, शालीमार एक्सप्रेस, इंटरसिटी एक्सप्रेस, अकालतख्त एक्सप्रेस, गोल्डन टेंपल एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस आदि ट्रेनों में चलता है।
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सिपाहियों को दिया गया प्रशिक्षण : सीओ
जीआरपी सीओ धर्मेंद्र यादव ने बताया कि कैमरों को लगाने का उद्देश्य यह है कि पारदर्शी व्यवस्था बनी रहे। कई बार ऐसा होता है कि चेकिंग के दौरान यात्री सिपाहियों से उलझ जाते हैं और गलत आरोप लगाने लगते हैं। सिपाहियों को बॉडी वॉर्न कैमरे के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है। 22 नए बॉडी वॉर्न कैमरे दे दिए हैं।