सहारनपुर। सांसद और विधायक निधि की तरह नगर निगम सहारनपुर में पार्षद निधि भी होगी। हालांकि इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन नगर निगम ने ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें एक निर्धारित धनराशि रहेगी। इसे पार्षद सांसद और विधायक की तरह अपनी मर्जी के विकास कार्यों पर खर्च कर सकेंगे। इसके लिए 836 करोड़ रुपये के बजट में 30 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
महानगर में 70 वार्ड हैं। इनमें कई वार्ड ऐसे हैं, जिनकी कॉलोनियों की हालत गांवों से भी बदतर है। रामगढ़ इसका बेहतर उदाहरण है, जो पास की ग्राम पंचायत से पिछड़ा हुआ है। जिन 32 गांवों को मिलाकर शहर को नगर पालिका से नगर निगम बनाया गया था। वहां तक विकास पहुंचा तो है, लेकिन पूरी तरह उन गांवों की सूरत को बदल नहीं सका है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए नगर निगम बोर्ड ने पास किए बजट में 30 करोड़ रुपये पार्षदों की निधि के रूप में रखे हैं। यदि इन 30 करोड़ रुपये को 70 वार्डों में बांटा जाए तो प्रत्येक वार्ड के हिस्से में 42 लाख रुपये से अधिक आते हैं, लेकिन नगर निगम ने निर्णय लिया है कि जिस वार्ड की कॉलोनियां विकसित हैं वहां की बजाय विकास के क्षेत्र में पिछड़े वार्डों पर अधिक ध्यान दिया जाए। यही वजह है कि नगर निगम विकास में पिछड़े वार्डों को 50 से 60 लाख रुपये तक विकास के लिए देगा। यह पार्षद तय करेंगे, कि उन्हें यह निधि किस कार्य में लगानी है।
पिछड़े वार्डों का विकास करना है मकसद : महापौर
महापौर डॉ. अजय कुमार ने बताया कि पार्षद निधि का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, लेकिन हमने ऐसा किया है कि पार्षदों को विकास के लिए अलग से 50 से 60 लाख रुपये की धनराशि दी जाए। इस धनराशि को वह अपने वार्ड में अपनी मर्जी के विकास कार्य पर खर्च कर सकेंगे। हमारा ध्यान पिछड़े वार्डों पर अधिक रहेगा। जो वार्ड विकसित हैं वहां के पार्षदों से अपील की गई है कि वह इस धनराशि की उम्मीद कम रखें, क्योंकि हमें पिछड़े वार्डों को भी विकास में ऊपर लाना है तो ऐसा करना हेागा।