सहारनपुर। स्वच्छता के लिए नहीं पर्याप्त कर्मचारी, स्वच्छ सर्वेक्षण की कागजों में ही तैयारी। नगर निगम का हाल कुछ ऐसा ही है। नगर निगम के पास महानगर की सफाई के लिए जितने कर्मचारी होने चाहिएं। उसके 50 फीसदी भी नहीं हैं। इसी कारण से महानगर की सफाई व्यवस्था चौपट चल रही है।
महानगर में 70 वार्ड हैं, जिनमें भवनों और अन्य संपत्तियों की संख्या करीब 2.13 लाख है। क्षेत्रफल की बात करें तो दिल्ली रोड पर चुन्हेटी गाड़ा से लेकर बेहट रोड के चकदेवली तक करीब 16 किलोमीटर और अंबाला रोड पर गंगोह तिराहा से दाबकी जुनारदार तक करीब 10 किलेामीटर। इतने बड़े क्षेत्रफल में सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम के पास मात्र 1600 सफाईकर्मी कार्यरत हैं, जबकि नियमानुसार सफाईकर्मियों की संख्या 3600 से अधिक होनी चाहिए। इस हिसाब से सफाईकर्मियों की संख्या 50 फीसदी भी नहीं है।
रामलीला मैदान को बनाया डलावघर
निगम ने कुछ समय पहले डलावघरों को खत्म करने की बात कही थी। बेहट अड्डा पर रामलीला मैदान के पास मंदिर के सामने डलावघर खत्म किया था। इसका खूब प्रचार भी किया गया, लेकिन उसके बाद रामलीला मैदान को ही डलावघर बना दिया गया, जिसमें दो से तीन जगह कचरा डाला जा रहा है।
एमआरएफ सेंटर की व्यवस्था बिगड़ी
महानगर में करीब पांच वर्ष पहले एमआरएफ सेंटर खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। तब कुछ एमआरएफ सेंटरों पर कचरे को अलग-अलग किया जाता था। निकलने वाले कांच, लोहा, टीन, प्लास्टिक आदि को इकट्ठा कर रीसाइकिलिंग के लिए बेचा जाता था, लेकिन एमआरएफ सेंटर का परिकल्पना चौपट है। इसका बेहतर उदाहरण शकलापुरी मार्ग का सेंटर है, जो केवल कागजों में चल रहा है।
पांच साल से तालों में कैद हैं शौचालय
स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर महानगर में जगह-जगह सार्वजनिक शौचालय और यूरिनल बनाए गए थे। इनमें से ज्यादातर शौचालयों के अभी तक ताले नहीं खुले हैं। जिला अस्पताल के पीछे, फुलवारी आश्रम के पास, बासठ फुटा रोड पर बने शौचालय इसका बेहतर उदाहरण हैं।
हमारे पास जरूरत के 50 फीसदी भी कर्मचारी नहीं हैं। इसीलिए सफाईकर्मियों की कमी को दूर करने के लिए कार्यकारिणी समिति से कर्मचारी भर्ती की मांग की गई है।
- डॉ. प्रवीण शाह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम