केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के लिए अब एक और बड़ी तैयारी की जा रही है। शहर में ऐसे ई-रिक्शाओं को चिन्हित कर बाहर किया जाएगा जो पंजीकृत कंपनियों की बजाय जुगाड़ से तैयार कर चलाई जा रहे हैं। ये ई-रिक्शा सड़कों से पार्किंग स्थलों पर अतिक्रमण और ट्रैफिक की समस्याएं बढ़ा रही हैं।
इन दिनों यातायात माह मना रही ट्रैफिक पुलिस ने अब सत्यापन की तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए संभागीय परिवहन विभाग से मदद मांगी है। यातायात पुलिस का कहना है कि ऐसे ई-रिक्शाओं का सत्यापन परिवहन विभाग की टीमें ही बेहतर ढंग से कर सकती हैं।
ट्रैफिक पुलिस तो सत्यापन के बाद सड़कों पर सही सिस्टम से ई-रिक्शाओं के संचालन में आगे सहयोग करेगी। अगले माह से यह विशेष सत्यापन शुरू होने की संभावना बताई गई है। पुलिस अधीक्षक यातायात ओमबीर सिंह बताते हैं कि इस समय शहर में 2200 से भी अधिक ई-रिक्शा हैं।
इनमें काफी ऐसे हैं जो पंजीकृत कंपनियों की न होकर जुगाड़ से तैयार की गई हैं। संभागीय परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को ऐसी जानकारियां मिली हैं कि 34 पंजीकृत कंपनियों से ली जाने वाली ई-रिक्शा के संचालन के लिए जहां करीब सवा लाख रुपये तक का खर्च आता है।
वहीं जुगाड़ से तैयार ई-रिक्शा 60-70 हजार रुपये में ही मिल जाती हैं। इसके चलते अपेक्षा से कहीं अधिक ई-रिक्शाओं को कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा है।
पंजीकृत कंपनियों वाली ई-रिक्शाएं ही चल पाएंगी ः पुलिस अधीक्षक यातायात ओमबीर सिंह का कहना है कि स्मार्ट सिटी मिशन के बीच ही शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए केवल पंजीकृत कंपनियों वाली ई-रिक्शा ही संचालित होंगे। जुगाड़ से तैयार ई-रिक्शाएं नहीं। इसलिए संभागीय परिवहन विभाग के साथ ही सत्यापन किया जाएगा।
कप्तान ने कराया था पुलिस लाइन में रजिस्ट्रेशन
कुछ माह पहले पूर्व एसएसपी नितिन तिवारी ने शहर में ई-रिक्शा के सत्यापन के लिए पुलिस लाइन में ई-कोड के साथ सीरीज नंबर देकर रजिस्ट्रेशन कराया था। उसी के अनुरूप ही रूटों पर चलाया गया था लेकिन सरकारी नियम कायदों में यह व्यवस्था मान्य नहीं थी। इसे अस्थायी तौर पर ही अपनाया गया था।