गांवों को स्वच्छ करने की प्रशासन की मंशा को सफाई कर्मचारियों की कमी से पलीता लग रहा है। जिले के सौ से अधिक गांवों में सफाई कर्मचारी ही नहीं है। पचास से अधिक कर्मचारी तो नौकरी ही छोड़ चुके हैं।
जबकि इतने ही कर्मचारी अन्य कार्यों में लगा दिए गए हैं। जबकि ग्राम प्रधान सफाई कर्मचारी की नियुक्ति के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
ग्राम पंचायतों को स्वच्छ रखने के लिए सरकार ने प्रत्येक गांव में एक सफाई कर्मचारी के अनुसार जिले के 1609 राजस्व गांवों के लिए इतने ही सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियां की।
एक बार नियुक्ति होने के बाद सभी को उनके गांवों में भेज दिया गया, लेकिन धीरे-धीरे इन सफाई कर्मचारियों में कमी आने लगी। कुछ सफाई कर्मचारियों को यह काम रास नहीं आया और यह नौकरी छोड़कर दूसरी नौकरी शुरू कर दी। कुछ ही अध्यापक की नौकरी लग गई और कोई पुलिस में भर्ती होकर चला गया।
लगभग 52 कर्मचारी इसी प्रकार कम हो गए। शेष कर्मचारियों में से लगभग एक दर्जन कर्मचारियों को विकास भवन में टर्न बनाकर ड्यूटी में लगा दिया गया, जबकि कुछ सफाई कर्मचारी उच्चाधिकारियों के आवासों में लगा दिए गए। सौ से भी अधिक गांव बिना सफाई कर्मचारियों के ही रह गए। जिससे उनमें सफाई कार्य ठप हो गया।
पिछले तीन साल से यही स्थिति बनी हुई है। ग्राम प्रधान गांव की सफाई न हो पाने से लोगों की शिकायतों से परेशान हो चुके हैं और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
यहां तक कि प्रधानों को अपने गांव में सफाई कर्मचारी लगवाने के लिए मंत्रियों तक की सिफारिश लगवानी पड़ रही है। डीएम तक को प्रार्थना पत्र देना पड़ा है। सीडीओ से भी गुजारिश कर रहे हैं। लेकिन अधिकारी जब भी दबाव आता है तो एक गांव को खाली कर दूसरे गांव में सफाई कर्मचारी भेज रहे हैं, वहां से तीसरे गांव में।
इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी अमरजीत सिंह का कहना है कि कर्मचारी काफी कम हैं जिस कारण ग्राम पंचायतों में सफाई नहीं हो पा रही है। हालांकि वह लोगों को खुद ही अपने गांव की सफाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जिससे सफाई कर्मचारी न होने पर भी गांव साफ रह सके।